सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों द्वारा सार्वजनिक मंच पर कानून व्यवस्था से जुड़े मुद्दों और पहलुओं से नाराजगी व्यक्त करना देश के कानून व्यवस्था और लोकतंत्र के लिए अच्छे संकेत नहीं दे रहे हैं सुप्रीम कोर्ट के जज चेलामेश्वर मदन लोकूर कुरियन जोसेफ और रंजन गोगोई ने प्रेस वार्ता के माध्यम से अपनी बातें रखी अपने संबोधन में इन जजों ने सबसे पहली बात यह कहीं कि जब कोई विकल्प नहीं बचा तो हम आपके सामने आए हैं हमने कार्यों को सही तरीके से करने के लिए कहा था कुछ महीने पूर्व एक पत्र लिखकर हमने चीफ जस्टिस को बताने का प्रयास किया था कि देश का लोकतंत्र खतरे में है उसके बावजूद भी अब तक स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं हो पाया है।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के चार न्यायाधीश प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है आगे न्यायाधीश ने कहा हमने चीफ जस्टिस से इस विषय पर मुलाकात कर अपनी बात रखा था कई गाड़ियों से संबंधित हमने शिकायत भी किया था साथ ही इन सब को ठीक किए जाने की जरूरत पर भी जोर दिया था चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा से मिलने के बाद भी जब कुछ नहीं हुआ तो हम आप प्रेस मीडिया के बंधुओं के सामने हैं।


आपको बता दें जिस तरह से इन चारों जजों ने अपनी बातें रखी और जो कुछ भी कहा उसे हर किसी के लिए जानना जरूरी है जजों ने कहा कि हम पहली बार मीडिया के सामने आए हैं और आप सबके सामने हैं आने का मुख्य उद्देश्य हैं कि लोगों के सामने हम अपनी बात रख सकें कि हमने अपनी आत्मा बेचा नहीं है इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा द्वारा मामलों के आवंटन समेत कई मामले उठाए गए।

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