बिहार में बालू संकट को लेकर एक लंबे समय से चर्चा चल रही है। हर दूसरे दिन बालू संकट के समाप्त होने की बात खबरों में आती है। पर बालू मिलना पिछले छः महीने से बंद है। बालू से मजदूर वर्ग के एक बड़े तबके का रोजी रोटी जुड़ा हुआ है। बालू नहीं मिलने के कारण इस वर्ग के लोग मजदूर से भिखारी बनने की स्थिति में आ गए हैं।

पिछले सप्ताह नववर्ष के पूर्व संध्या के अवसर पर न्यूज़ बिहार जब पटना की सड़कों पर रात्रि के समय लोगों को खाना, कपड़ा और कंबल बांट रहा था। तो सड़क के किनारे सोने वालों में अधिकतर लोग मजदूर थे जो बिहार एवं बिहार से बाहर के राज्यों से पटना में मजदूरी करने के लिए आए हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि मेहनत करने वाले हम मजदूरों की स्थिति भिखारी जैसी हो गई है। कहीं भी काम नहीं मिल रहा है, इसके लिए सबसे बड़ी जिम्मेवार बालू है। नहीं मिलने के कारण निर्माण का कार्य पूरी तरह से ठप है। जिससे मजदूर हाथ पर हाथ रखे दो जून की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मजदूरों ने कहा की किसी तरह हम अपना पेट तो पाल लेते हैं। परंतु घर पर जो हमारे परिवार बाल बच्चे बूढ़े माता-पिता हमारा इंतजार कर रहे हैं, उनसे हम नजरे तक नहीं मिला पा रहे हैं।


पिछले कई दिनों से राज्य सरकार की तरफ से यह घोषणा की जा रही है कि प्रदेश में जल्द खत्म होगा संकट। खनन और भूतत्व विभाग द्वारा बालू संकट को समाप्त करने के लिए पहल कर बालू खनन के बंदोबस्तधारियों के रुके हुए ई-चालान को जारी करने का कल यानी सोमवार 08 जनवरी 2018 से घोषणा कर दिया है। इसके साथ बिहार राज्य खनिज निगम के गोदामों से भी सरकार समानांतर बिक्री करेगी। इससे जुड़े संकट को समाप्त करने के लिए बंदोबस्तधारियों के साथ सम्बंधित विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ बैठक में यह निर्णय लिया गया है। इसके बिक्री से होने वाली आय का 5 फीसद कमीशन  राज्य खनिज निगम को दिए जाने पर सहमति बन गई है।

जैसा कि आप सभी जानते हैं बालू संकट उठाव के चालान बंद होने से उत्पन्न हुआ था। इसके साथ ही राज्य सरकार  खनन का नया नियमावली लागू करने पर अड़ी हुई थी। न्यायालय ने हस्तक्षेप कर बालू समस्या को तत्काल समाप्त करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया था। सूत्रों से जानकारी मिल रही है कि विभाग ने महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए सभी रुके हुए  बंदोबस्त धारियों का ही चालान जारी करने का फैसला कर दिया है। विभाग के सचिव अरुण प्रकाश ने बताया कि जिनका लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। सिर्फ उन बंदोबस्तधारियों को ई चालान जारी नहीं किया जाएगा।
सरकार की नई घोषणा से स्थिति सुधरने की पूरी पूरी उम्मीद बन गई है। विभाग ने निगम के बफर स्टॉक से भी बालू की सीधी बिक्री करने का निर्णय लिया है।जिन घाटों की बंदोबस्ती नहीं की गई है वहां से निगम के गोदाम को  सीधे सप्लाई की जाएगी। सरकार के इस फैसले से लगभग 6 माह से अधिक समय से बेरोजगारी का दंश झेलने वाले बालू मजदूरों को एक बार फिर से रोजी रोटी के अवसर उपलब्ध होने का आस बढ़ गया है।

सरकार के सूत्रों ने कहा है किस सरकारी रेट पर बालू उपलब्ध होने से लोगों को मनमानी दर से कीमत चुकाने से छुटकारा मिलेगा। न्यायालय द्वारा हस्तक्षेप के बाद एक बार फिर से लाखों लाख बालू कारोबारियों और इस व्यवसाय से रोजी रोजगार प्राप्त करने वाले मजदूरों व अन्य लोगों को एक बार फिर से राहत मिलने की संभावना बढ़ गई है। देखना होगा कि आम लोगों को बालू कब से उपलब्ध हो पाता है।

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