बिहार की राजनीति में काफी उथल पुथल मची हुई है. जबानी वार प्रतिवार का दौर चल रहा है. इन जबानी वार-प्रतिवारों की कोई सीमा नहीं होती. सब अपने स्तर तक पहुँच कर जवाब देते है. राजद सुप्रीमो लालू यादव अपने पुत्र तेजस्वी यादव के साथ आरोपों के दलदल में फंसे हुए हैं, इसी दलदल में वह नीतीश कुमार को भी फंसा देखना चाहते हैं.
बीते दिनों पहले ही लालू परिवार द्वारा आयोजित भागलपुर सभा को नीतीश कुमार ने नुक्कड़ नाटक करार दिया था. इसपर जवाब देते हुए लालू पुत्र तेजस्वी ने कह था कि नीतीश का बयां लोकतंत्र का अपमान है. हम जनता के प्रतिनिधि है, विपक्ष हैं और जनता सृजन घोटाले की जानकरी चाहती है.
आपको बता दें कि तेजस्वी के साथ साथ लालू यादव ने भी नीतीश और सुशिल मोदी पर प्रहार करते हुए कहा था कि जब तक नीतीश कुमार और सुशील मोदी पर एफआईआर दर्ज नहीं होता वो दम नहीं लेंगे. लालू यादव ने भी सुशिल मोदी की तरह दस्तावेज दिखाते हुए नीतीश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए. उनका आरोप है कि 10 जुलाई से ही सरकारी चेक बाउंस होने शुरू हो चुके थे लेकिन इसके बावजूद सृजन घोटाला और एक महीने तक छिपाया गया. इसके आगे लालू यादव ने यह भी कह कि नीतीश कुमार को घोटाले में फंसने का आभास हो गया था, इसीलिए 10 जुलाई से लेकर 26 जुलाई के बीच नीतीश कुमार लगातार दिल्ली के चक्कर लगाते रहे. इसके बाद बीजेपी के साथ डीलिंग करके और महागठबंधन तोड़कर नीतीश ने नई सरकार बना ली.
इन्ही सब आरोपों से वार करते हुए लालू प्रसाद यादव ने मांग की कि जिस तरह से नीतीश कुमार, तेजस्वी को जनता के सामने स्पष्टीकरण देने की बात कर रहे थे, उसी तरह अब वो ख़ुद जनता के बीच जाएं.

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