किस बात के लिए और कैसी न्याय यात्रा निकाल रहे तेजस्वी, भारतीय संविधान के तहत एक समृद्ध न्यायिक व्यवस्था भारत में है। तेजस्वी यादव के पिता लालू प्रसाद और उनका पूरा परिवार भ्रष्टाचार के मामले में फंसा हुआ है तथा कानून और न्यायिक प्रक्रिया के तहत उसकी सुनवाई और सजा भी हो रही है फिर यह किस तरह की न्याय यात्रा पर जाने की बात कर रहे हैं। जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने तेजस्वी यादव के प्रस्तावित न्याय यात्रा पर तंज कसते हुए उक्त बातें कहीं नीरज कुमार यहीं नहीं रुके उन्होंने आगे और भी बहुत कुछ कहा।


बिहार सरकार की हकीकत बताने के नाम पर तेजस्वी यादव के नया यात्रा करने का फैसला लिया है इस पर जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कबीर के एक दोहे से उन पर तंज कसा है ” कबीर भेष अतीत का करतूती करै  अपराध, बाहरी दिसै साध गति, याहैँ महा असाध।” इस पंक्ति को उद्धृत करते हुए नीरज कुमार कहां है कि कबीर ने लोगों को पहले ही चेताया है। पर  उनपर इन सबका  कोई असर नहीं  होने वाला अब ऐसा लगता है कि अपने बेनामी संपत्ति की खोज में निकल रहे हैं तेजस्वी पर शायद उन्हें पता नहीं कि इन सब से अब कुछ हासिल होने वाला नहीं है क्योंकि बिहार में अब सबकुछ डिजिटल हो गया है।

तेजस्वी यादव की प्रस्तावित न्याय यात्रा पर तंज कसते हुए नीरज कुमार ने कहां है कि तेजस्वी के पिता लालू प्रसाद बेनामी संपत्ति अर्जित करने का रिकार्ड बनाने में लगे रहे। सत्ता पर बैठ कर चारा घोटाला किया, उसे छूपाने के लिए चरवाहा विद्यालय खोला। अब उसी चारा घोटाले में सजायाफ्ता है और जेल भोग रहे हैं। इधर तेजस्वी पिता द्वारा भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्ति की खोज में यात्रा करने जा रहे हैं। पर उन्हें कुछ भी मिलने वाला नही है क्योंकि उनकी यात्रा का उद्देश निजी है। लालू प्रसाद और उनके परिवार को राज्य और राज्य की जनता से कोई लेना देना नहीं है। ये सब एक ड्रामा है जो उन्हें विरासत में मिली है।

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