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मधुबनी। सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों के द्वारा न्यायपालिका के इतिहास में पहली बार प्रेस कांफ्रेंस पर मधुबनी व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ताओं की प्रतिक्रिया उत्साहजनक नहीं हैं। सार्वजनिक मंच से जजों द्वारा अपनी बात को रखने को वे गलत परंपरा और गलत संदेश मानते हैं। पेश है इस गंभीर मसले पर अधिवक्ताओं की राय-

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इस तरह जजों द्वारा सार्वजनिक मंच पर अपनी बात रखने के लिए आगे नहीं आना चाहिए। यदि उन्हें कोई शिकायत रही है तो उसे उचित फोरम पर ही उठाना चाहिए था। इस तरह की घटना से न्यायपालिका की साख कम होगी।

– संजय कुमार मिश्र अधिवक्ता

Þसुप्रीम कोर्ट के चार जजों द्वारा प्रेस कांफ्रेस करने की घटना को पहली बार हुई है। लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए था। इस तरह के कार्य से आम जनता के बीच गलत संदेश गया है। इससे न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचा है।

– सत्यनारायण यादव, जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व महासचिव

ऐसी घटना पहली बार देखने में आई है कि सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से अपनी बात रखी। लेकिन उन्होंने यह नहीं सोचा है कि इसका जनता के बीच क्या संदेश जाएगा। न्यायपालिका सर्वोपरि मानी जाती है। इस बात को समझने की जरूरत है।

– उमेश कुमार ¨सह अधिवक्ता,

सुप्रीम कोर्ट के जजों को प्रेस कांफ्रेंस नहीं करना चाहिए था। जज किसी पार्टी के नेता तो नहीं है कि उन्हें सार्वजनिक मंच पर अपनी बात को रखनी पड़ी। उचित फोरम में ही अपनी बात को रखने की परिपाटी उचित है।

– दीपेन्द्र कुमार झा अधिवक्ता

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