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मधुबनी । सरकारी सेवा से रिटायर्ड कर्मी लाभ के लिए टकटकी लगाए रहते हैं। अवकाशप्राप्त कर्मियों को सरकार द्वारा निर्धारित लाभ सुनिश्चित कराने में संबंधित विभाग की उदासीनता सामने आती रही है। तय लाभ की उम्मीद लगाए अकाशप्राप्त कर्मियों के मामलों के निष्पादन में विभागीय लचर व्यवस्था से इनकी परेशानी बढती ही जा रही है। अवकाशप्राप्त कर्मियों को पेंशन, भविष्यनिधि सहित अन्य लाभ के लिए परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। अनेक अवकाशप्राप्त कर्मियों को लाभ संबंधी कार्यालय, कोषागार व बैंक का महीनों स चक्कर लगाना पड़ रहा है

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बैंकों का लगाना पड़ रहा चक्कर

जिले के सैकड़ों अवकाशप्राप्त कर्मियों को पेंशन, भविष्यनिधि, बीमा राशि जैसे लाभ के लिए कार्यालयों के अलावा बैंकों का चक्कर लगाना पड़ रहा है। कई अवकाशप्राप्त कर्मियों का वर्ष 1976 तक डाकघर के माध्यम से जीपीएफ राशि की कटौती का भुगतान अब तक नहीं हो सका है। द्वितीय कालबद्ध प्रोन्नति का लाभ से भी वंचित होना पड़ रहा है। रिटायर्ड कर्मियों को निर्धारित लाभ के लिए पेंशनर एसोसिएशन द्वारा लगातार आवाज उठाया जाता रहा है।

अभाव में निराशा की जिदंगी जी रहे अवकाशप्राप्त कर्मी

अवकाशप्राप्त कर्मी सरकार द्वारा निर्धारित लाभ के अभाव में निराशा की जिदंगी जी रहे है। अनेक ऐसे कर्मी अस्वस्थता के कारण कार्यालय का चक्कर लगाते-लगाते परेशान हो जाते हैं। अनेक अवकाशप्राप्त शिक्षकों को वर्ष 1976 से 96 तक जीपीएफ का लाभ नहीं मिल पाया है। कई सहायक शिक्षकों को रिटायर्ड हुए 7-8 वर्ष गुजर जाने के बाद भी प्रथम वेतनमान का रिभाइज पेंशन, उपादान का लाभ नहीं मिल रहा है। जबकि 31 मार्च 2012 को रिटायर्ड होने बाले शिक्षकों को भविष्यनिधि का लाभ, वर्ष 2002 में रिटायर्ड कर गए अनेक शिक्षकों को पेंशन में जीपीएफ का लाभ नहीं मिल रहा है।

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