बिहार विकास ठप्प है पूछने पर झुंझला रहे, दो – दो इंजन वाली मोदी-नीतीश की सरकार में तालमेल नहीं। बिहार व केंद्र में एक ही गठबंधन की सत्ता होने के बावजूद बिहार विकास ठप्प है। पूछने पर अब बिहार सरकार के मंत्री झुंझलाने लगे हैं। चर्चा थी दो दो इंजन से बिहार का द्रुतगति से विकास होगा। पर ऐसा लग रहा कि दोनों इंजन उल्टी दिशा में पटरी पर चल रहे हैं। स्थिति तो ये भी लग रहा है कि खाली इंजन है न बोगी है न ड्राइवर ऐसे में विकास की यात्रा मंजिल पर पहुँचने में विपक्ष को संदेह है।


बात विपक्ष के हवाले से करें तो बिहार में जब एनडीए की सरकार बनी तो इसे डबल इंजन वाली सरकार का नाम दिया गया। कारण केंद्र और बिहार दोनों जगह एक की गठबंधन की सरकार का बनना था। लेकिन डबल इंजन लगने के बाद भी बिहार के प्रति केंद्र की उपेक्षा में कोई कमी नहीं आई है। चर्चा है कि भाजपा के स्टेटजी मेकर क्रेडिट नीतीश कुमार को देना नहीं चाहते हैं। इसलिए जो पहले से जैसा चल रहा है उसी पर आगे बढ़ना बेहतर होगा इसी पर काम चल रहा है। केंद्र और प्रधानमंत्री मोदी की योजनाओं को ज्यादा से ज्यादा प्रचारित करना और जमीन पर लोगों तक पहुंचाने की योजना पर भाजपा काम कर रही है।

विपक्ष का कहना है कि ये बातें सिर्फ हमारे कहने भर की नहीं है। बल्कि वो आंकड़े और रिपोर्ट कह रहे हैं जो बिहार में नई सरकार के बनने के बाद सामने आए हैं। बढ़ में हुई तबाही जिससे बिहार में पिछले साल 19 जिलों में भारी नुकसान हुआ था। इसके बाद बिहार सरकार ने केंद्र से मदद की गुहार लगाया था। लेकिन अभी तक बिहार को कुछ मिला नहीं है, जबकि केंद्र और बिहार दोनों स्थान पर एनडीए की यानी डबल इंजन की सरकार है। विपक्ष का मानना है कि नीतीश कुमार जल्दबाजी में जो एनडीए के साथ जाने का फैसला किये वो अब भारी पड़ने लगा है। विकास की रेल पूरी तरह से डिरेल हो गई है जिसे पटरी पर लाने में नीतीश कुमार असमर्थ हैं।

विपक्ष के साथ साथ दबे स्वर में सत्ता के तरफ से भी स्वर निकलने लगे हैं। लोग करने लगे हैं कि डबल इंजन लगने के बाद बिहार को न तो केंद्र से विशेष राज्य का दर्जा मिला और न ही बाढ़ राहत के लिए मदद। जानकार इससे पहले की स्थिति को बेहतर बता रहे हैं। उनका कहना है आंकड़ो के अनुसार जो पिछले साल बिहार में बाढ़ आई उससे एक करोड़ 71 लाख लोग प्रभावित हुए थे। इससे कुल 19 जिलों में बड़ी बर्बादी हुई थी और लोग प्रभावित हुए थे। पीएम और सीएम खुद बाढ़ प्रभावित इलाकों का दो बार दौरा किए थे। उन्होंने माना भी था कि बाढ़ की स्थिति भयावह है, पर कई महीने गुजरने के बाद भी केंद्र से कोई भी मदद या राहत नहीं आया। सबसे तो ज्यादा आश्चर्य सीएम नीतीश कुमार की इस मुद्दे चुप्पी से हो रहा है।

सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इससे प्रभावित के आंकलन के बाद सात हजार छह सौ करोड़ की मदद का मेमोरेंडम भेजा था। पर अभी तक मुआवजा से जुड़ा यह मेमोरेंडम प्रक्रिया फाइलों में अल्टी पलटी कहा रहा है। जबकि केंद्र और बिहार में एनडीए की दो-दो इंजन वाली सरकार है। इस मुद्दे पर जवाब देने में बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन मंत्री का झुंझलाना और ये कहना कि “डबल इंजन लग गया है इसका मतलब यह थोड़े है कि हम लोग बोरा लेकर गए और पैसा भर ले आए।” बहुत कुछ कह रहा है।

राजद इस मामले में पहले से ही हमलावर है और केंद्र तथा राज्य सरकार पर पीड़ित लोगों के साथ आपसी खींचातानी में हासिये पर रखने का आरोप लगा रहा है। राजद के नेता नीतीश कुमार पर हमला कर तंज कसते हुए कह रहे हैं कि नीतीश तो बीजेपी के सामने नतमस्तक हो चुके हैं। इस विषय पर राजद का कहना है कि बिहार की एनडीए सरकार में सब कुछ ठीक नहीं व्हेल रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्र सरकार से बाढ़ में हुए नुकसान की भरपाई के लिए लोग बड़ी उम्मीद लगाए हुए थे। पर दोनों ही ढलें में श्रेय लेने को लेकर मची होड़ में बिहार की जनता त्राहि त्राहि कर रही है। वर्ना 11 सितंबर को ही मेमोरेंडम केंद्र को भेज दिया गया था। खुद केंद्रीय टीम और प्रधानमंत्री ने सब कुछ देखा और आंकलन किया था। उसके बाद केंद्रीय टीम आई कई बैठकें भी हुईं पर इन सब के बावजूद भी लोग केंद्र और राज्य सरकार का मुंह देखने को मजबूर हैं। प्रधानमंत्री जब पटना विश्वविधालय के शताब्दी समारोह में आये थे वहां भी लोगों ने उम्मीद लगाए थी। पर बातों के सिवा कुछ भी नहीं मिला और बिहार पहले से भी ज्यादा पीछे होता चला गया। किसी तरह का कोई विकास नज़र नहीं आ रहा है। भाजपा तो हमेशा ही चुनावी मोड़ में रहती है चाहे वो प्रधानमंत्री हों केंद्र या राज्य के मंत्री सभी चुनाव के अलावे कुछ दूसरा काम नहीं जानते। अब उनका अनुशरण करते हुए जदयू भी सब कुछ छोड़छाड़ कर चुनाव की तैयारी में लग गई है। बिहार के विकास और जनता से किसी को भी कोई सरोकार नही रह गया है।

Subscribe us on whatsapp