पटना, एक बार फिर से नोटबंदी जैसा ही नोटों की किल्लत झेल रही बिहार की जनता। बैंकों में लंबी लंबी कतारें लग रही हैं नगदी निकासी के लिए। बता दे की लगन की समय चल रहा है इसमें अधिकतर नगदी की जरूरत होती है। पर बैंक 20 हजार से ज्यादा खुदरा देने के लिए तैयार नहीं है। मुश्किल यह कि मांग के अनुरूप लोगों को बैंक शाखाओं से नकदी नहीं मिल पा रही है। इससे ग्राहकों की परेशानी बढ़ गई है। पर उधर रिजर्व बैंक का कहना हैं कि हो रही है पर्याप्त आपूर्ति।

भारतीय रिजर्व बैंक का दावा
एक तरफ लोगो परेशान हैं तो दूसरी तरफ रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय सूत्रों का कहना है कि बिहार झारखंड के सभी 218 करेंसी चेस्ट में माँग के अनुरूप उपलब्धता कराई जा रही है। हर क्षेत्र में पूरी पूरी जरूरत और मांग के हिसाब से आपूर्ति की जा रही है।

भारतीय स्टेट बैंक ऐसोसियेशन सूत्रों के अनुसार मांग से 50 फ़ीसद काम आपूर्ति।
इधर भारतीय स्टेट बैंक ऑफिसर्स ऐसोसियेशन की माने तो उनका कहना है मांग के हिसाब से आपूर्ति नहीं कर रहा रिजर्व बैंक। 40-50 फ़ीसद मांग से कम कैश की आपूर्ति हो रही है। ऐसे में कैश किल्लत से बिहार स्थित सभी बैंक शाखाएं जूझ रही हैं। ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के वरीय उपाध्यक्ष डॉ. कुमार अरविंद ने बताया कि बिहार के सभी जिलों में कैश की किल्लत है। ग्राहक परेशान हैं। बैंक शाखाओं में पर्याप्त मात्रा में नकदी नहीं रहने से हंगामा भी हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक पर्याप्त मात्रा में नोटों की आपूर्ति नहीं कर रहा है। इस वजह से शाखाओं से 20 हजार रुपये से अधिक की निकासी ग्राहक नहीं कर पा रहे हैं।

विभिन्न बैंक के ATM की स्थिति भी ठीक नहीं
बैंक शाखाओं के साथ ही एटीएम व्यवस्था भी बेपटरी हो गई है। भारतीय स्टेट बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन सूत्रों ने कहा कि नोटों की कम आपूर्ति से बैंक शाखाओं के साथ ही एटीएम व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाना मुश्किल हो गया है।

शादी वाले घर के लोग छोटे नोटों के लिए भटकने को विवश हैं।
बिहार में प्रतिदिन बैंकों को 1250 करोड़ की जरूरत गई जिसके एवज में मिल रहे सिर्फ 500 करोड़। एक तो पहले ही कम आपूर्ति हो रही है। ऊपर से लगन के कारण मांग में 20 से 30 प्रतिशत की वृद्धि ऐसे में बैक और ग्राहक दोनों परेशानी का सामना कर रहे हैं। दूसरी तरफ बड़े नोटों के प्रचलन से छोटे नोट और खुदरा की भी भारई समस्या है। नए छोटे नोटों के लिए भी शादी वाले घर के लोग ग्भटक रहे हैं। न्यूज़ बिहार से एक परेशान व्यक्ति विजय सिंह जो एक होटल में कर्मचारी हैं बताया कि होटल से वक्त निकाल कर नए नोट की गड्डी के लिए दसो बैंक शाखाओं का चक्कर लगाया, लेकिन कहीं उपलब्धता नहीं है। वहीं उतरी मंदिरी निवासी शिव प्रसाद अपने भतीजे की शादी के लिए 10 रुपये, 20 रुपये की गड्डी के लिए भटक रहे हैं।

नोटबंदी के बाद अक्सर किसी न किसी रूप में नोट से संबंधी दिक्कतें लगातार सुनने देखने में आ रही है। 2000 के नोट का खुदरा लेने के लिए लोगों को भटकते देखा है। हमारे न्यूज़ बिहार के छायाकार अभय कुमार के भाई एक शादी से लौट रहे थे। उनके पास खुदरा मात्र तीन रुपये थे और 2000 का एक नोट। सुबह से न तो वो इस कारण नास्ता चाय ही कर पाए न किराए देने के लिए खुदरा हो पाया। मोबाईल गिरवी रख कर किराया चुकाया बाद मे पैसे दे कर मोबाईल वापस लिया।

RBI और बैंक दोनों में दावा प्रतिदावा के बीच ग्राहक मजबूर हो झेल रहा है।

एक तरफ रिजर्व बैंक का मांग के अनुरूप आपूर्ति का दावा तो दूसरी तरफ बैंकों का कम आपूर्ति का रोना। इन सब के ऊपर लोगों में खुदरा की किलकत के लिए भागाभागी कहीं न कही पूर्व नियोजित योजना की कमी दर्शा रही है। इस अव्यवस्था में दोष चाहे जिसका भी हो पर अंततः झेलना उस उपभोक्ता को पड़ रहा है। जिसने इन्हीं अवसरों के लिए बैंक में अपना रुपया जमा कर रखा है।

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