बिहार प्रदेश कांग्रेस पार्टी के पूर्वअध्यक्ष अशोक चौधरी के मुखर होने से एक बार फिर से घमासान मच गया है। अशोक चौधरी ने कांग्रेस की प्रदेश में स्थिति पर चिंता व्यक्त किया है। उन्होंने अपनी इस चिंता पर आलाकमान को ध्यान देने की बात कही है। अशोक चौधरी के अनुसार कब तक कांग्रेस पिछलग्गू बन कर चलेगी।


उपचुनाव की घोषणा के बाद से कांग्रेस के वर्तमान स्थिति पर अपना विचार रखते हुए अशोक चौधरी ने सुझाव दिया है की अब और देर पार्टी के लिए कष्ट देने वाला होता जा रहा है। चौधरी ने बिहार के प्रभारी प्रदेश अध्यक्ष कौकब कादरी को लेकर बयान दिया है। उनकी राय है कि केंद्रीय नेतृत्व और आलाकमान को बिहार जैसे राज्य जहां कांग्रेस का खासा जनाधार है। पिछले चुनाव में पार्टी के 40 में से 27 प्रत्यासी को जनता का समर्थन दे विधान सभा भेजा है। ऐसे में बिहार में कांग्रेस को किसी भी ऐसे गठबंधन का हिस्सा नही रहना चाहिए जिसमें सम्मानजनक स्थिति नहीं हो।

आपको बता दें अशोक चौधरी बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में लगभग चार साल तक काबिज रहे हैं। इस बीच कई तरह से पार्टी को मजबूत करने का प्रयास उन्हीने किया जैसा कि उनके समर्थक और कांग्रेस कार्यकर्ता बताते हैं कि पिछले विधान सभा के चुनाव में चौधरी के नेतृत्व में कांग्रेस के 27 विधायक जीत कर विधान सभा पहुंचे थे। अपने एका एक पद से हटाये जाने के बाद काफी कुछ कहा और पार्टी के केंद्रीय व राज्य नेताओं पर शाजिश करने और स्वयं को अपमानित करने का भी आरोप लगाया था। अब एक बार फिर से तीन-चार माह बाद मुखर होकर अपनी बात रकहे हैं।

बिहार में उपचुनाव को लेकर अशोक चौधरी ने कहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को जल्द से जल्द बिहार में कांग्रेस को लेकर स्थिति स्पष्ट कर देनी चाहिए। बिहार में वर्तमान प्रभारी प्रदेश अध्यक्ष कौकब कादरी पर आलाकमान को विचार कर या तो उन्हें पूरी जिम्मेवारी दे देनी चाहिए या फिर जिसे पद पर बैठाना है उसे शीघ्र बैठाया जाए। अशोक चौधरी ने राहुल गाँधी से अपील करते हुए कहा कि बिहार में कांग्रेस काफी मजबूती के साथ खड़ी है और लोगों की पहली पसंद है। ऐसी स्थिति में नेतृत्व के उहापोह में कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति का जनता पर भी असर पड़ेगा। या तो कौकब कादरी को पूर्ण जिम्मेदारी दे दी जाए या अगर किन्ही और को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाना हो तो जल्द से जल्द बना देना चाहिए। इस बयान के बाद एक बार फिर से अशोक चौधरी चर्चा में हैं।

जैसा कि आप सभी जानते हैं उपचुनाव की घोषणा के बाद महागठबंधन की तरफ से कांग्रेस ने खुल कर कोई बात नही कही थी। अशोक चौधरी के इस बयान ने कांग्रेसियों को झकझोरने का काम किया है। अब हर तरफ से सम्मानजनक गठबंधन और एक सीट की दावेदारी की बात होने लगी है। स्थिति यहां तक बन गई है कि राजद-कांग्रेस के बीच भभुआ सीट को लेकर माहौल काफी गर्म हो गया है। अशोक चौधरी ने भी राजद को दो टूक में गठबंधन धर्म का पालन करने को कहा है। अशोक चौधरी ने कहा कि राजद को यदि गठबंधन करना है तो सम्मानजनक तरीके से करे। अररिया और भभुआ की सीट देखा जाए तो कांग्रेस को मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को राजद का पिछलग्गू बनकर नहीं रहना चाहिए. अशोक चौधरी ने कहा कि अररिया सीट पर चुनाव लड़ने से राष्ट्रीय स्तर पर मैसेज जाएगा.  पिछले कई वर्षो से राजद ने कांग्रेस को कुछ नहीं दिया है.

अशोक चौधरी यहीं नही रुके उन्होंने कहा कि राजद को ये नहीं भूलना चाहिए कि कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी है और कभी भी पिछलग्गू नहीं बन सकती। अशोक चौधरी के इस बयान के बाद से कांग्रेस में जैसे गर्मी आ गई हो। कि नेताओं ने उपचुनावबक9 लेकर दनादन विचार देना शुरू कर दिया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सदानंद सिंह ने तो यहां तक ऐलान कर दिया की उपचुनाव में भभुआ सीट पर हाल में कांग्रेस ही लड़ेगी। अगर राजद वहां से चुनाव में खड़ा होता है तो भी कांग्रेस वहां से अपना प्रत्यासी खड़ा करेगी।

अब स्थिति ये है कि एनडीए के बाद महागाठबंध में भी उपचुनाव की चौसर पर पासा धकाधक फेंका जा रहा है। मात्र तीन सीटों पर होने वाले उपचुनाव एक नए मोड़ पर आ गया है। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि एक लोकसभा अररिया, और दो विधानसभा, भभुआ और जहानाबाद के लिए मतदान होना है। जिस तरह का सियासी उमस बिहार में देखा जा रहा है वो मुख्य चुनाव से भी ज्यादा टसल वाला हो गया है। जुड़े रहिये न्यूज़ बिहार के साथ हम आपको हर उस हलचल से रूबरू कराते रहेंगे जिसका संबंध बिहार और बिहार की जनता से है।

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