पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में अपने पुराने संगठनों से टिकट नहीं मिल पाने के कारण कई छात्रनेता निर्दलीय ही मैदान में हैं। इसमें दो चेहरे सबसे ज़्यादा चर्चित हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से निकलकर आये दिव्यांशु भारद्वाज और छात्र जदयू से मनीष कुमार। हालांकि चुनाव में विश्वविद्यालय किसी के नाम के आगे उसके संगठन को तो नहीं जोड़ती, लेकिन समर्थित होने के कारण उसे उस पार्टी से जोड़ा जाता है।

दिव्यांशु भारद्वाज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे लेकिन संगठन ने उन्हें कोई भी पद नहीं दिया। इसके बाद वो निर्दलीय ही अपना नॉमिनेशन फाइल करके इस महासमर में उतर आए। कल उन्होंने यूनिवर्सिटी में अपना अभियान चलाया जिसमें बहुत बड़ी संख्या में छात्र उनके साथ दिखे। ऐसा पहली बार किसी छात्रसंघ चुनाव में देखने को मिला हो। दिव्यांशु संगठन से अलग उतरकर भी अपनी लोकप्रियता के आधार पर लोगों के लिये ये नज़ारा पेश किया।

इसी तरह पटना लॉ कॉलेज के छात्र और छात्र जदयू के बागी मनीष कुमार के पीछे भी बड़ा छात्रसमर्थन दिख रहा है। अपने संगठन से टिकट नहीं मिल पाने के कारण उन्होंने महासचिव पर निर्दलीय उतरने का फैसला लिया और छात्र इन्हें जीत के प्रबल दावेदारों में देख रहे हैं। पुराने छात्र होने का चुनाव में इन्हें फ़ायदा मिल सकता है, लेकिन कितना मिलेगा या नहीं मिलेगा ये परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा।

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