श्राद्ध में और कुछ अन्य निषिध बातें |
श्राद्ध में लोहे के पात्र का उपयोग कदापि नही करना चाहिए |लौह पात्र में भोजन करना भी नही चाहिए तथा ब्राह्मणों को भी नही कराने चाहिए |यहाँ तक कि भोजनालय या पाकशाला में भी उसका उपयोग न करें |आप केवल शाकादि फलादि काटने में उपयोग कर सकते हैं श्राद्धादि में |लोहे को दर्शन मात्र से पितृगण वापस लौट जाते हैं।

श्राद्ध कल्पलता का पुनः दर्शन …………

न कदाचित् पचेदन्न- मयः स्थालीषु पैतृकम् |

अयसो दर्शनादेव पितरो विद्रवन्ति हि ||

कालायसं विशेषेण निन्दन्ति पितृकर्मणि |

फलानां चैव शाकानां छेदनार्थानि यानि तु ||

महानसे$पि शस्तानि तेषामेव हि संनिधिः ||

#चंदन गन्ध 

श्राद्धेषु विनियोक्ताव्या न गंधा जीर्णदारुजा |

कल्की भावं समासाद्य  न च पर्युषिताः क्वचित् ||

पूतिका मृगनाभिं वा रोचनां रक्तचंदनम् |

कालीयकं जोंगकं च तुरुष्कं चापि वर्जयेत् ||

#अर्थात् …………  श्रीखण्ड, चंदन, खस, कर्पूर सहित श्वेत चंदन ही प्रशस्त है |अन्यथा ……पुरानी लकड़ी का, निर्गन्ध   काष्ट का, कस्तूरी ,केसर , रक्तचंदन, गोरोचन आदि त्याज्य है |
मनुस्मृति, विष्णु पुराण, ब्रह्मांड पुराण, मत्स्य पुराण, वायु पुराण और कूर्म पुराण मे आया है कि वे ब्राह्मण श्राद्ध मे वर्जित है जो चोर, नास्तिक, पतित, मूर्ख, धूर्त, मासंभक्षी विक्रयी च, व्यापारी, नौकर, कुनखी, कृष्णदन्त, गुरुद्वेषी, शूद्रापति, शुल्क से पढ़ने पढ़ाने वाला, जुआरी, नपुंसकादि अधम  है |

पद्म पुराण सृष्टि खण्ड श्लोक संख्या ९ /६४ -६६  के अनुसार त्याज्य खाद्य के अन्तर्गत राजमाष, मसूर, अरहर, गाजर, कुम्हणा, गोल लोकी, बैगन, शलजम, हींग, प्याज, लहशुन, काला नमक, काला जीरा, सिंहाड़ा, जामुन, पिप्पली, सुपारी, कुलथी, कैथ, महुआ, अलसी, पीली सरसो और चना ये नही खाना चाहिए |
पुरोहित चेरिटेबल ट्रस्ट

पुरोहित अजित कुमार तिवारी
#क्रमशः ………………

Subscribe us on whatsapp