नीतीश जी के लोग गरीब गुरबों के पेट पे लात मार पादुका पूजन में लगे हैं  झूठ तो मत बोलें। राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और प्रवक्ता शिवानंद तिवारी ने जदयू पर हमला करते हुए कहा। वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने कहा कि सरकारी पक्ष का आरोप है कि कल राजद के बंद की वजह से वैशाली और कटिहार मिलाकर दो लोगों की मौत हो गई। इन मौत की जवाबदेही राजद की है। टेलिग्राफ़ अख़बार में अमित भेलारी की इस मुत्तलिक रिपोर्ट छपी है। पर दोनों जिलों के पुलिस अधीक्षकों ने ऐसे किसी ख़बर से इंकार किया है। वहीं सम्बंधित जिलों के पदाधिकारियों से बग़ैर बात किए सरकारी पार्टी के झूठे आरोप को सही बताते हुए उसे छाप देने या गला फाड़कर गुंडागर्दी बताने को क्या कहिएगा !

तिवारी कहते है कि ऐसा नहीं है कीं बंद में जीवन सामान्य था। लोगों को निश्चित परेशानी हुई होगी। मैंने नीतीश और सुशील मोदी, दोनों की पार्टियों का बंद देखा है। उनसे कुछ अलग तरह का तो नहीं था कल का हमारा बंद ! लोग किसी अन्याय या सरकार की किसी ग़लत नीति का विरोध करने सड़क पर उतरेंगे तो लोगों को परेशानी नहीं होगी यह दावा कौन कर सकता है। लोगों को संघर्ष का ताप लगेगा क्या इसी तर्क से अन्याय का प्रतिकार नहीं किया जाए। तब लोकतंत्र का पीडंदान कर देना ही विकल्प बचता है। इस विकल्प के लिए हम तैयार नहीं हैं क्योंकि बिहार आंदोलन से जनहित और जनाकांक्षा पूरा करता आया है।


शिवानंद तिवारी हवाला देते हुए कहते हैं कि पिछले छः महीने से लाखों लोगों का काम-धंधा बंद है। कृषि के बाद बिहार में बालू खनन और निर्माण का क्षेत्र ही सबसे ज़्यादा रोज़गार देने वाला क्षेत्र है। इस क्षेत्र पर माफियाओं  का क़ब्ज़ा है। ये आरोप लगा कर नीतीश सरकार के द्वारा बालू उत्खनन का काम पिछले छ: महीने से बंद करा दिया गया है। इसका सबसे कठोर प्रभाव शरीर से मेहनत के द्वारा इस क्षेत्र से उपार्जन कर परिवार पालने वाले श्रमिकों पर पड़ा है। इसके बाद राज मिस्त्री, ट्रैक्टर-ट्रक चलाने वाले ड्राइवर-खलासी आदि महीनों से बेरोजगार बैठे हैं।  इनका परिवार कैसे जीवन बसर कर रहा है ? इसकी चिंता इस संवेदनशून्य सरकार को नहीं है। ट्रक, ट्रैक्टर या इस काम मे लगने वाली मशीन ख़रीद कर इस काम में लगे लोगों ने बैंक से क़र्ज़ लिया हुआ है। किस्त तक नहीं चुका पा रहे हैं। लाखों लोग त्रस्त हैं, यह तो एक तरह का गंभीर सरकारी अपराध है।

तिवारी तल्ख तेवर में कहते हैं कि नीतीश कुमार के पादुका – पूजकों का दावा है कि उनको भ्रष्टाचार शब्द से ही नफ़रत है। लेकिन यह समझ के बाहर है कि इतने नफ़रत के बावजूद नीतीश सरकार में घोटालों का रेकाड कैसे बनता जा रहा है! घोटालेबाजों पर त्वरित कार्रवाई क्यों नहीं होती है! सृजन घोटाले में शामिल जयश्री ठाकुर के यहाँ 2013 में निगरानी की छापेमारी में नगदी सहित लगभग बीस करोड़ की अवैध संपति का  पता चला था। उनको सेवा से बर्खास्त करने में ईमानदार सरकार ने चार साल लगाए।

तिवारी ने सीधे सीधे नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि अन्य घोटालों में जो नामज़द अभियुक्त व अफ़सर चैन से अपनी कुर्सी पर बैठे हुए हैं। आप कह सकते हैं कि नीतीश को भ्रष्टाचार शब्द से नफ़रत है। लेकिन दूसरी तरफ भ्रष्टाचारियों से बेपनाह मुहब्बत है ! शिवानंद तिवारी कहते हैं कि इनके अग़ल-बग़ल के लोगों को देख कर आप स्वंय तस्दीक़ कर लीजिए। एक बार फिर से बालू को लेकर राजद के द्वारा बुलाये गए बंद को लेकर दोनों पक्षों में जुबानी जंग तेज हो गई है।

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