आज समाज में लोग इतने स्वार्थी होते चले गए हैं उन्हें समाजसेवा तो दुर की बात हैं बखूबी से अपनी रिश्ते भी नहीं निभा पाते। जब तक अपने समाज के लोग समाज के प्रति कुछ करने के लिए जवाबदेही लेने को तैयार न होंगे तब तक यह समाज इसी तरह गर्त में जाता रहेगा ।

लेकिन आज भी समाज में कुछ लोग हैं जिन्हें दूसरों के दुख बर्दाश्त नहीं हो पाता। वे लोग समाज के प्रति भावनात्मक रुप से जुड़े रहते हैं। आज हम चर्चा करेंगे मिनेर्वा आर्गेनाइजेशन के सचिव प्रदीप्त की, कि किस तरह वे राजधानी पटना की सड़को पर अपनी टीम के साथ घुम घुमकर लोगों की सेवा एवं नाटक के माध्यम से जागरुकता अभियान चलाते आ रहे हैं। आगे प्रदीप्त की बातें उन्ही की भाषा में बताते हैं।

“पिछले कई सालों से समाज सेवा कर दुसरो को खुशी या यूं कहे कि कहीं न कहीं उनके चेहरों पर अपनी खुशी ढूंढ रहा हूँ। आज याद करता हूँ तो लगता है मैने अपनी ज़िंदगी मे लोगो द्वारा कुछ खुशी व प्यार अपनी झोली में जरूर बटोरे है और उनलोगो के लिए मेरी ज़िंदगी उधारी है।

5 फरवरी 2004 को जब मैंने मेनका गुप्ता जी को ब्लड डोनेट किया। तब ये मालूम ही नही था कि ये सिलसिला यू ही चलता रहेगा। पर आज अच्छा लगता है जब कुछ लोग मुझे बोलते है कि आपको मैं फेसबुक से जनता हूँ और आपकी कार्यो को भी देखता हूं। तब से लेकर आज तक मैने 30वी बार रक्तदान किया है। और हर 3 महीने होने के बाद जरूरतमंद के लिए तैयार हो जाता हूँ।

अपने जन्मदिन के 2 दिन पहले यानी 5 दिसंबर 2016 को eye donate किया ताकि मेरे बाद भी लोग मेरी नज़रो से दुनिया देख सके। 3 साल पहले जब लोगो को ठंड से मरते हुए व बिना कपड़ो के देखा तो घर से ही निकाल कर लोगो को कपड़े देने लगा ताकि कोई भी व्यक्ति ठंड से ना मरे। आज इसी सामाजिक कार्य को ध्यान में रख मिनेर्वा आर्गेनाइजेशन संस्था बनाया ताकि लोगो के साथ बड़ी संख्या में जुड़ लोगो की मदद कर सके। इसके लिए संस्था नाट्यकला का भी सहारा लेती है ताकि लोगो में जागरूकता आये। संस्था ने अभी तक 2500 लोगो को कपड़े से मदद कर उनके चेहरे पर खुशी लाने की कोशिश की है। संस्था समय समय पर पब्लिक कलेक्शन कैम्प भी आयोजित करती है ताकि लोगो से सामने से कनेक्ट हो सके और लोगो की संस्था के प्रति राय जान सके। संस्था ने दीघा आगजनी कांड, बाढ़ राहत, वृद्धाश्रम, अनाथालय आदि लोगो के लिए कार्य करती रहती है। ताकि सब खुश रहे सब की मौलिक जरूरत पूरी हो। संस्था को लोगो द्वारा जो कपड़े मिलते है उन्हें संस्था धो कर पैक करती है और फिर उन जरूरतमंदो तक पहुचती है और फिर उस व्यति के द्वारा दिये कपरो से लोगो की मदद की सूचना सोशल मीडिया के माध्यम से लोगो के बीच रखती है। ताकि पारदर्शिता बनी रहे। संस्था द्वारा अभी तक 500 लोगो को रक्त दान से मदद दिया जा चुका है। संस्था द्वारा एक अभियान चली जाती है जिसका नाम था ” ठंड उन्हें भी लगती है” जिसमे लोगो द्वारा दिए गए बहुत सारे गर्म कपड़ो से लोगो की मदद की गई । संस्था में मुख्य रूप से रविन्द्र जी, प्रणय राज,अविनाश कुमार, राकेश भोला जी, दीपक तिवारी, चंदन केसरी, कृष्णकांत जी, रंजीत कुमार राम, जहांगीर खान, राजनन्दन, आदि शामिल है। संस्था इन सबका दिल से आभार व्यक्त करता है।

Subscribe us on whatsapp