बिहार में चूहों को पहले छापेमारी में बरामद शराब थानों से गायब करने का दोषी बताया गया था, अब बाढ़ जैसी विभीषिका लाने के लिए भी चूहों को ही दोषी ठहराया जा रहा है. नीतीश कुमार के जल संसाधन मंत्री का कहना है, “चूहों के कारण ही तटबंध कमजोर हो गए, टूट गए और बाढ़ आ गई.” जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा कि अचानक 900 एमएम वर्षा झेलना आसान नहीं है। इतनी वर्षा का मतलब होता है दस से बारह फीट पानी। यानी समुद्र जैसा नजारा। लगातार 72 घंटे में हुई इतनी वर्षा राज्य में फ्लैश फ्लड का कारण बनी। जहां तक चूहों को सवाल है, तो यह कोई नई बात नहीं है। केन्द्र सरकार ने भी अपनी गाइडलाइन में चूहों से बांध को बचाने की बात कही है।

जल संसाधन मंत्री शनिवार को प्रेस से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग चूहों को लेकर मजाक उड़ा रहे हैं। एक सवाल पर कहा कि राजद प्रमुख लालू प्रसाद तो किसी बात पर गंभीर होते ही नहीं। उनके समय में बाढ़ आती थी तो कहीं देखने जाते नहीं थे। पीड़ितों का क्या हाल होता था सब जानते हैं। बाढ़ राहत घोटाला को अब भी लोग भूले नहीं हैं।

लिहाजा उनकी बातों का जवाब देना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि कमला बलान के बाएं तटबंध पर काफी सीपेज था। चूहों के कारण लगभग दस हजार से अधिक सीपेज को विभाग के अधिकारियों ने बंद किया। यह अलग समस्या थी, जिसमें विभाग की बड़ी ताकत लगी हुई थी। बागमती में तो रात-रातभर सीपेज ठीक किया जाता रहा। उन्होंने कहा कि गंगा का जलस्तर अगर नीचे नहीं होता तो और परेशानी होती।

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