राजद के प्रदेश प्रवक्ता चितरंजन गगन ने नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि लालू प्रसाद एक जन-नेता हैं और वे आमलोगों की भाषा का इस्तेमाल करते हैं। वातानुकूलित कक्ष में बैठ कर राजनीति करने वाले सामंती और बुर्जुआ सोंच वाले लोगों को आम लोगों की भाषा नागवार लगना स्वाभाविक है।

राजद नेता ने कहा कि जदयू नेताओं की बातों में अभी कडूवाहट होना स्वाभाविक भी है। क्योंकि आमलोग जदयू से यह जानना चाह रहे हैं कि केन्द्र में एनडीए गठबंधन की सरकार है या भाजपा की सरकार है। जदयू को मंत्रीमंडल में शामिल नहीं करने से भी ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इतने व्यापक स्तर पर हुये मंत्रीमंडल विस्तार में जदयू के शीर्ष नेतृत्व को कोई जानकारी तक नहीं दी गई और तो और इतने बड़े समारोह में औपचारिक या अनौपचारिक रूप से हीं आमंत्रित भी नहीं किया गया।

जबकि कांग्रेस जैसे विरोधी दलों को आमंत्रित किया गया था। स्पष्ट है कि भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व नीतीश जी की नेतृत्व वाली जदयू के स्वतंत्र नेतृत्व को नकार चुकी है। नीतीश जी के लिए भी बेहतर होगा कि वे अपने नेतृत्व वाली जदयू को भाजपा में औपचारिक रूप से विलय की घोषणा कर दे।

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