नीतीश कुमार एनडीए के साथ जाकर बिहार के लोगों से तो धोखा कर ही चुके हैं। अब तो नीतीश जी ऐसे मकड़जाल में हैं जहां छटपटा रहे हैं। इसका सबसे बड़ा असर पिछले कई महीनों से बिहार  विकास पर पड़ा जो बिल्कुल अवरुद्ध है। हालात यह है कि नीतीश कुमार के पास अब बिहार में करने के लिए कोई काम नहीं बचा है। इसलिए वह खुद को महिमामंडित करवा रहे हैं। इस पर बिहार के लोगों की गाढ़ी कमाई का पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है। बिहार विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार पर आरोप लगाते हुए उक्त बातें कही।


तेजस्वी यादव ने बिहार के अलग-अलग हिस्सों में घूम-घूम कर बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ जो अभियान चला रहे हैं उससे छवि चमकने वाली नहीं। झूठ मूठ का समीक्षा यात्रा करने को लेकर तंज कसते हुए तेजस्वी ने कहा कि राज्य में नियोजित शिक्षक और अन्य कर्मचारी मानदेय नहीं मिलने से भुखमरी के कगार पर हैं। जबकि दूसरी तरफ सरकारी तंत्र श्रम और समय दोनों का दुरुपयोग कर नीतीश कुमार का चेहरा चमकाने में लगा हुआ है।

तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार की सरकार द्वारा प्रस्तावित 21 तारीख के मानव श्रृंखला को लेकर भी तंज कसा। तेजस्वी ने कहा की इच्छा के विपरीत जबरदस्ती सरकारी कर्मचारी और स्कूली बच्चों को मानव श्रृंखला बनाने के लिए ज्यादती किया जा रहा है। तेजस्वी यादव ने आगे कहा, राज्य सरकार शिक्षा, रोजगार, विकास, स्वास्थ्य एवं कानून व्यवस्था के मामले में काफी पिछड़ चुकी है। स्थिति यह है कि इस मामले में सरकार बेबस और लाचार दिख रही है। इन सभी को छुपाने के लिए सरकारी पैसे का दुरुपयोग हो रहा है। इस तरह के ऊलजलूल बातों से क्या साबित करना चाहती है नीतीश सरकार।

तेजस्वी यादव ने कहा दहेज और बाल विवाह विरोधी कानून पहले से ही हैं। पर इस कानून को पिछले 13 वर्षों के शासन में नीतीश कुमार की सरकार ने कड़ाई से लागू नहीं किया। मुख्यमंत्री को जहां इस पर जवाब देना चाहिए, वहां खुद इस मुद्दे को उठा कर समाज सुधारक बनने का असफल प्रयास कर रहे हैं। तेजस्वी ने तंज कसते हुए कहा “बहुत धुंध है प्रचार का असर नहीं होगा, क्योंकि लोगों को चेहरा नहीं दिखेगा।”

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