आरा : शहीद सीआरपीएफ जवान के बूढ़े पिता अब्दुल खैर खान को बेटे की शहादत पर गहरा सदमा लगा है। हालांकि उन्हें बेटे की शहादत पर गर्व भी है। उन्होंने कहा कि मुझे गर्व है कि मेरा बेटा अपने सीने पर गोली खाकर भारत मां की अस्मिता की रक्षा के लिए शहीद हुआ है, ऐसा नसीब सबको नहीं मिलता है। अल्लाह ऐसी संतान सबको दें। यह कहते-कहते फफक पड़े और चश्मा उतारकर रोने लगे।

फिर कहा- जवान बेटा तो बाप की बुढ़ापा की लाठी होता है। हर पिता का अरमान होता है कि उसका जनाजा अपने बेटे के कन्धे पर जाये। लेकिन जब देश की आन-बान और शान का सवाल हो तो सब बेमानी है। मुझे एक ओर जवान बेटे के खोने का दु:ख है तो दूसरी ओर भारत मां की अस्मिता की रक्षा के लिए शहादत का गर्व भी है। बात करते- करते रो पड़ते हैं और उनकी आंखों से आंसुओं की अविरल धाराएं निकल पड़ती हैं।

पीरो निवासी सीआरपीएफ जवान मोजाहिद खान बचपन से ही बहादुर था और अपनी बहादुरी को उसने सोमवार को शहीद होकर साबित भी कर दिया। मोजाहिद के सभी दोस्त उसकी बहादुरी की चर्चा करते नहीं थकते और मोजाहिद की बहादुरी उसके दोस्तों के बीच चर्चा का विषय बनी है। उसके दोस्तों में भागलपुर निवासी वार्ड पार्षद शहंशाह खान व सिकंदर और पीरो गांव निवासी मूलधन पाण्डेय, नेयाज खान, मशरुर खान, शब्बू खान व साजिद आलम बताते हैं कि वह हर काम साहस व बहादुरी के साथ करता था।

उसके दोस्त बताते हैं कि फुटबॉल खेलने में भी वह बेहतर था। दोस्तों के लिए दिलेर था और बोला था कि मार्च में छुट्टी आने पर दोस्तों के साथ पार्टी का आयोजन करेगा। दोस्त साजिद आलम ने बताया कि रविवार की रात मोजाहिद से उसकी बात हुई थी। मोजाहिद ने साजिद के खाते में सात हजार रुपये डालने की बात कही थी, जो मोजाहिद के घर देना था। इसके अलावा मोजाहिद ने साजिद से करन नगर व श्रीनगर के कफ्र्यू और फायरिंग की चर्चा की थी।

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