आरा : जिला मुख्यालय से 10 किलो मीटर की दूरी पर है बाबा लंगटनाथ का ऐतिहासिक मंदिर. उदवंतनगर प्रखण्ड क्षेत्र के सोनपुरा पंचायत के अतिनिर्जन स्थल में अवस्थित बाबा लंगट नाथ धाम शिव भक्तों के लिए हमेशा से कौतुहल का विषय रहा है. हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां जलाभिषेक करने आते हैं. सावन माह शिव के प्रिय होने के कारण हजारों की संख्या में शिव भक्त यहां पूजा अर्चना के लिए आते हैं. वर्ष के सावनी एंव फाल्गुनी महाशिवरात्री के अवस़रपर बाबा लंगट नाथ मंदिर में पूजा अर्चना के लिए भक्तों की विशेष भीड़ देखी जा सकती है.

शिव महापुराण एंव श्रीमदभागवत महापुराण के वर्णित कथाओं में त्रिलोक विजयी वाणासुर के अराध्य होने का गौरव बाबा लंगटनाथ को है. यानी उस समय उसने बाबा लंगटनाथ को पसन्न भी किया था.कालान्तर में चेरो खरवार राजाओं द्वारा बाबा लंगटनाथ के अराधना का प्रमाण मिलता है. यहां राजाओं ने अपनी ओर से प्रसन्न करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. जिसका प्रमाण अभी भी मिलता है.

राक्षसराज वाणासुर की राजधानी षोणितपुर बताया गया है जो वर्तमान में भोजपुर जिला के मसाढ गांव के नाम से विख्यात है. बाबा लंगटनाथ धाम मसाढ से पांच किलो मी. दूर अतिनिर्जन स्थान में अवस्थित है. मंदिर की विशेषता है कि इसका निर्माण शिव लिंग पर ही हुआ है. मंदिर में नन्दी के अलावा गणेश व पार्वती की प्रतिमा है. मंदिर में प्रवेश करते ही दाहिनी ओर हनुमानजी की प्रतिमा है. हजारों वर्ष से खुले आसमान तले होने के कारण स्थानीय लोगों ने इन्हें लंगटनाथ के नाम से पुकारा.

आज महा शिवरात्रि है और महाशिवरात्रि के दिन हजारों शिवभक्त इस मंदिर में सुबह से ही पूजा अर्चना करने पहुंच रहे हैं. महाशिवरात्री के अवसर पर हजारों की संख्या में शिवभक्त जलाभिषेक को आते है. सालों शिव एंव अन्य देवताओं की आरती व पूजा की जाती है. सावन व फाल्गुन के महाशिवरात्री के समय ग्रामीण मेले का आयोजन होता है. लोगों का मानना है कि यहां महादेव से मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है.

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