बिहार में अब खेल के नाम पर कोई घोटालेबाजी नही होगी। खेल के नाम पर अधिकारियों को अनियमितता करना भी आसान नहीं होगा. ‘जियो टैंगिंग’ के जरिए सैटेलाइट से हर गतिविधि पर नजर रखी जायेगी. मोदी सरकार की मंशा है कि खेल से संबंधित हर भवन, मैदान, खेल-खिलाड़ी का एक ‘डेटाबेस’ तैयार किया जाये. ताकि जरूरत पड़ने पर उसी डेटाबेस के आधार पर खेल के क्षेत्र में बेहतर काम कराया जा सके. किसी भी स्तर पर कोई गड़बड़ी न कर सके. इसी को ध्यान में रखते हुए ‘जियो टैंगिंग’ की शुरुआत की गयी है. इसके तहत केंद्र सरकार ने सभी प्रदेशों के साथ ही बिहार सरकार से खेल व संरचना से संबंधित कई बिंदुओं पर जानकारी मांगी है. इसमें सभी खेल मैदानों की सूची, भवनों की सूची, प्रखंड स्तर पर पांच बेहतर खिलाड़ी, जिला स्तर पर पांच बेहतर खिलाड़ियों के नाम  आदि शामिल है.

सबकुछ ठीक-ठाक रहा तो केंद्र सरकार की पहल पर ग्रामीण स्तर तक के खिलाड़ियों के बेहतर दिन आयेंगे. पक्षपात नहीं हो पायेगा. खेल सुविधाओं की हकीकत से बाकायदा प्रधानमंत्री तक रू-ब-रू हो पायेंगे. प्रदेश के सभी जिलों, प्रखंडों से पूरी जानकारी आने के बाद यह तस्वीर साफ हो जायेगी कि कहां पर क्या है. कहां किस चीज की जरूरत है. दरअसल, केंद्र सरकार भी यही चाहती है. ताकि नीति बनायी जाये, बजट जारी हो तो इन सब चीजों का ध्यान रखा जाये. सभी जिलों, प्रखंडों के ब्योरा का ‘जियो टैंगिंग’ होगा. दरअसल, केंद्र सरकार ने इसको वेबसाइट से जोड़ा है. इस पर फोटो और पूरा विवरण अपलोड करना है. खेल मैदान की लंबाई-चौड़ाई से लेकर उसकी पूरी भौगोलिक स्थिति भी दी जायेगी.

संबंधित क्षेत्र के महत्वपूर्ण खेलों व बेहतर खिलाड़ियों का नाम भी होगा. जब भी सरकार की ओर से कोई बजट जारी होगा, उससे पहले ‘जियो टैंगिंग’ के जरिये उस क्षेत्र, उस भवन, उस मैदान आदि के बारे में पूरी जानकारी फोटो सहित एक क्लिक पर सामने होगी. खिलाड़ियों के नाम पर विभिन्न योजनाओं में छलावा होता है. अब आसान नहीं होगा. केंद्र सरकार के पास हर वो जानकारी होगी, जो घपले की पोल खोज देगी. इसका सीधा लाभ खिलाड़ियों को होगा.

 

 

‘जियोग्राफिकल टैगिंग’ को ही ‘जियो टैगिंग’ कहा जाता है. इसके अंतर्गत सेटेलाइट से सरकार विभिन्न योजनाओं पर नजर रखती है. सैटेलाइट से इन योजनाओं के बारे में बारीक से बारीक जानकारी भी आसानी से मिल जाती है. इसके अंतर्गत 971 योजनाओं को जोड़ा जा रहा है. इसमें खेल, कृषि, वन, राजस्व आदि विभागों की योजनाएं शामिल हैं.

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