पद्मावत जो कभी पद्मावती के नाम से विवाद के सारे रिकॉर्ड को ध्वस्त करने के बाद भी रिलीज हो रही है। उस पद्मावत सिनेमा का विरोध उसी दिन से बहुत सारे लोग, संगठन कर रहे हैं, जब से इसका निर्माण शुरू हुआ। सिनेमा पद्मावत पर अपनी बेबाक राय रखने वाले “जौहर सफियाबाद” ने एक अपील के माध्यम से सोशल मीडिया में लोगों तक विचार रखा है। एक अत्यंत ही नेक, सुलझे हुए शख़्श साहित्यिक सोच से अपने विचार को सामाजिक, ऐतिहासिक और मानवतावाद के हवाले से रखा है जिसे न्यूज़ बिहार साझा कर रहा है।

न्यूज़ बिहार का उद्देश्य है सामाजिक सरोकार से जुड़ी बात, विचार, तथ्य को आधी से अधिक लोगों तक रखा जाए। इसी को लक्ष्य में रख आपके सामने महान शख़्शियत जौहर साफ़ियाबादी जी की अपील प्रस्तुत है।

🌺एक जरूरी एेलान🌺

पद्मावत फिल्म का हर एक बाशोउर मुसलमान विरोध कर रहा है। पद्मावत फिल्म पर तुरंत रोक लगनी चाहिए, यह जनहित एवं राष्ट्रहित में नहीं है। ज़नाब जौहर साफ़ियाबादी एक बड़े ही सुलझे हुए सम्मानित व्यक्तित्व के साहित्यकार हैं जिन्हें सामाजिक गंगा-जमुनी परंपरा का जीता जागता उदाहरण माना जाता है। हर धर्म और वर्ग में एक सामान आदर और प्रेम लोगों द्वारा जौहर साफ़ियाबादी की मिलता हैं।

उन्होंने लिखा है की, सुप्रीम कोर्ट का फैसला सर्वमान्य है। उसकी वैधानिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने की दिशा में फैसला सही है। परंतु जनहित और जनचेतना को ध्यान में रखते हुए सरकार एवं राष्ट्रपति महोदय को इस पर रोक लगा देनी चाहिए। ऐसा करना राष्ट्रहित में उचित होगा।

अलाउद्दीन खिलजी एक दुष्ट शासक था, जिस का इस्लाम से कोई लेना-देना नहीं था। बल्कि वह सत्ता मोह में घोर इस्लाम विरोधी भी था। ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार आजकल कई तथाकथित मोहम्मद, हुसैन, रजवी, नकवी अलवी जैसे महापुरुष लोग सत्ता भोग कर रहे हैं। परन्तु वह कहीं से मुसलमान नहीं हैं। उसी तरह चरित्रहीन अलाउद्दीन भी था। वह कभी मुसलमानों का आदर्श या चेहरा न रहा न है।

हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया को हर दिन नयी-नयी यातनायें देता रहा, सताता रहा और उनको दिल्ली से भगाने का हमेशा साज़िश करता रहा।

उस इस्लाम विरोधी दुष्ट का हमदर्द कभी कोई मुसलमान नहीं बन सकता। फिल्म पद्मावत को कोई मुसलमान न देखे न सोशल मीडिया पर अलूल-जलूल बात लिखें। यह मेरी कौम से अजिजाना-मुख्लेसाना अपील है।

समाज से होकर राज्य और अब देश भर मे विरोध का सामना कर रही फिल्म पद्मावत को लेकर जौहर साफ़ियाबादी के ये विचार उनके निजी हैं तथा यह किसी से भी न तो प्रभावित हैं न ही दबाव में दिए गए हैं। अब ये देखना होगा कि इस अपील के बाद किस तरह की प्रतिक्रिया आती है। वैसे पद्मावत को लेकर के समर्थन एवं विरोध का स्वर तहनी का नाम नहीं ले रहा है।

फक़ीर जौहर शफियाबादी
खानक़ाहे जौहरे आज़म,
गाजी़नगर, रायपुर छत्तीसगढ़

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