RSS प्रमुख मोहन भागवत बरगला क्यों रहे हैं,दलितों को शस्त्र और शास्त्र से दूर रखा और अब जो बयान दे रहे वो भारत के संविधान, स्थिति और सोच के अनुरूप कत्तई नही है। जदयू के नेता और पूर्व मंत्री श्याम रजक ने मोहन भागवत के बयान पर आपत्ति जताया है। रजक ने कहा कि RSS प्रमुख भागवत को
इस तरह की बातें नहीं करनी चाहिए। खास कर बिहार के परिप्रेक्ष में जहां सब कुछ ठीक है वहां इस तरह की बातें नहीं होनी चाहिए। दूसरे इस बात का भी ख्याल रखा जॉना चाहिए कि यहां भाजपा और जदयू के साथ एनडीए की सरकार चल रही है।

एक तरफ जहां राज्य के मुखिया नीतीश कुमार RSS प्रमुख भागवत के बयान से बच रहे हैं वहीं श्याम रजक के मुखर हो भागवत के बयान पर आपत्ति जताना बहुत कुछ कह रहा है। श्याम रजक ने कहा कि RSS प्रमुख भागवत जी का यह कहना कि आपसी फुट के कारण ही दूसरों नें हम पर राज किया। यह वक्तव्य सत्य है परंतु उससे ज्यादा बड़ा सवाल है कि दलितों-पिछड़ों को शस्त्र व शास्त्र से दूर रखा गया जिसके कारण दूसरे लोगों नें राज किया। अगर दलितों को शस्त्र व नेतृत्व दिया गया होता तो यह परिस्थिति कदापि न रहती। साथ ही उन्हें शास्त्र-अध्यापन व शिक्षा से दूर रख कर भी दूसरे हमलावरों को मौका दिया गया।

रजक आगे कहते हैं अन्यथा प्रथम विश्वयुद्ध में 500 महारों नें ब्रिटिश का साथ देकर जर्मन को परास्त किया था तथा 28000 पेशवाओं को धूल चटा दी थी। दलित वर्ग की प्रतिबद्धता और अदम्य साहस का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है। नाहक दलितों को जो समाज के अंतिम पायदान पर थे उन्हें और धकेलने का काम किया गया। कभी भी उन्हें सम्मान और बराबरी में लाकर खड़ा करने की कोशिश नहीं हुई।

श्याम रजक ने कहा, मोहन भागवत जी को इसका भी जिक्र अपनें वक्तव्य में करना चाहिए तथा दलितों के साथ हज़ारों वर्ष तक किए गए शोषण में लिए प्रायश्चित करना चाहिए। इसका प्रायश्चित तभी संभव है जब दलितों को उनका हक़ मिलेगा और आरक्षण के माध्यम से उनके बकाये मामलों की पूर्ति होगी। मंदिर से लेकर न्यायपालिका में दलितों को समान अधिकार दिए जाएं एवं जनसँख्या बल के आधार पर आरक्षण की व्यवस्था की जाये।

श्याम रजक ने कहा कि अगर सच में प्रेम है तो इस बात के लिए श्भागवत जी को सरकार पर दबाव बनाना चाहिए। दलितों और वंचितों के अधिकार की लड़ाई को अंतिम रूप देकर सरकार से उनके जक हुकूक और जरूरतों को पूरा काराजा मुख्यधारा में लाना चाहिए। तभी जाकर विभिन्न वर्गों के बीच की खाई समाप्त हो सकेगी एवं समतामूलक समाज का निर्माण हो सकेगा। सिर्फ बयान और बोलबचन और अधिक असमंजस पैदा करते हैं। बाबा साहब ने आरक्षण की परिकल्पना कर समाज के हर वर्ग को मुख्यधारा में लाने का एक सार्थक राह दिया जिसे अपना कर ही देश प्रदेश और समाज मे एकरूपता आ सकती है।

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