निजी स्कूलों में अपने बच्चों के नामांकन और उगाही को लेकर मनमानी से परेशान अभिभावकों के लिए राहत की खबर। बिहार के निजी स्कूलों पर पटना हाई कोर्ट के द्वारा मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने और अभिभावकों का शोषण करने के मामले में सुनवाई करते हुए। पटना उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को नोटिस भेजा है। बिहार सरकार से इस मामले में उच्च न्यायालय ने दो सप्ताह में जवाब मांगा है। इस खबर से ऐसा लग रहा है कि निजी विद्यालयों के ऊपर अब अंकुश लगेगा।

आपको बता दें की इस आशय से जुड़ी इस जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन की खंडपीठ के द्वारा आज बुधवार को सुनवाई की गई। जनहित याचिका को संजीव कुमार में दायर किया गया था। उन्होंने शिकायत किया था कि राज्य के निजी स्कूलों द्वारा समय-समय पर मनमाने तरीके से फीस और अन्य शुक्ल बढ़ा दिया जाता है। एक तो पहले से ही बेतहाशा फीस देने में अभिभावक परेशान हैं। ऊपर से जब भी मन मे आता है बिना किसी सूचना के आर्थिक बोझ डाल दिया जाता है। निजी स्कूलों की फीस वृद्धि की मनमानी से प्रदेश के लोग काफी आहत हैं।

याचिकाकर्ता संजीव कुमार के द्वारा याचिका में कई तरह का और भी खुलासा किया गया है। निजी स्कूल द्वारा छात्रों और अभिभावकों का कई तरीके से दोहन किया जाता है। किताब के लिए विशेष दुकान तो कॉपी भी वही जो स्कूल के द्वारा दी जाएगी। ड्रेस और अन्य सामान ख़ाश दुकान या फिर मनमाने कीमत पर स्कूल से खरीदने की मजबूरी। विषय की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने संज्ञान में लिया।

जनहित में की गई इस याचिका को न्यायालय द्वारा प्राथमिकता में रखते हुए राज्य सरकार को इस विषय पर जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। आगे देखना होगा कि इस पर राज्य सरकार का क्या रुख रहता है। क्या न्यायालय के इस आदेश के बाद अभिभावकों को राहत मिलेगी इसके लिए अभी इंतजार करना होगा। जुड़े रहिये न्यूज़ बिहार के साथ हम आपको हर उस खबर से रखेंगे बाख़बर।

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