समान काम समान वेतन के अलावे कोई भी बात स्वीकार नहीं किया जा सकता है। ये बयान है बिहार के नियोजित शिक्षकों का जिनके पक्ष में अदालत के द्वारा समान काम समान वेतन का फैसला सुनाया गया था। बिहार सरकार राज्य के नियोजित शिक्षकों को समान काम, समान वेतन दिए जाने जे अदालती आदेश पर ऊपरी अदालत में इस फैसले को ले गई । इन मुद्दे पर सत्ता के पक्ष में बैठे लोगों ने भी विरोध किया तथा समान काम समान वेतन दिए जाने की वकालत किया है।

सूत्रों के हवाले से जानकारी मिल रही है कि नीतीश सरकार ने नियोजित शिक्षकों के समान काम समान वेतन के मुद्दे पर एक कमिटी का गठन मुख्य सचिव अंजनी कुमार की अध्यक्षता में किया है जो इस मुद्दे पर बीच का साँसता निकालेगा। वहीं दूसरी तरफ नियोजित शिक्षक समान काम समान वेतन से कम कुछ भी लेने को तैयार नही है। अब इस मामले में बीच का रास्ता निकालने में जुटी सरकार क्या करेगी यह देखने वाली बात होगी।

बिहार सरकार ने गुरुवार 8 फरवरी को मुख्य सचिव रैंक के तीन अधिकारियों की एक कमिटी बना दी है। बताया जा रह है कि इस कमिटी में बिहार सरकार के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, सामान्य प्रशासन विभाग के प्रधान सचिव आमिर सुबहानी व विकास आयुक्त शिशिर सिन्हा को शामिल किया गया हैं। जो मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह की अध्यक्ष में इस समान काम समान वेतन मामले पर शिक्षक प्रतिनिधि से बात कर कोई बीच का रास्ता निकालेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में राज्य सरकार ने इस कमिटी का निर्माण किया है। यह कमेटी विभिन्न शिक्षक संगठनों से बात करेगी। बताया जा रहा है कि स्थायी शिक्षकों के समान नियमित वेतनमान मिलने की संभावना कम है। इसलिए नियोजित शिक्षकों को नियमित वेतनमान की जगह एकमुश्त में राशि बढ़ाने पर सहमति बनाई जा सकती है। समान काम समान वेतन मामले पर बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित कर इस पर शिक्षक संगठनों और व्यक्तिगत तौर पर भी विचार आमंत्रित किये थे। आगामी 15 फ़रवरी तक लोगों से उनके सुझाव मांगें गए हैं। प्राप्त सुझाव के आधार पर नव गठित कमिटी विचार कर 15 मार्च को अपना पक्ष सर्वोच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई में रखेगी।

वहीं दूसरी तरफ न्यूज़ बिहार को बिहार माध्यमिक शिक्षक संघर्ष समिति ने अद्यतन न्यायिक एवं बैठक से अवगत कराया है। संघर्ष समिति माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली द्वारा विशेष अनुमति याचिका संख्या (SLP) -000020/2018 दिनांक 29/ 01/ 2018 के आलोक में जो सर्वसम्मति से निर्णय लिया है इस प्रकार है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सुनवाई मे जारी आदेश के आलोक में मुख्य सचिव स्तर के तीन पदाधिकारियों की विशेषज्ञ समिति गठित की जा रही है। आदेश के आलोक में उपरोक्त समिति स्थानीय निकायों में नियोजित शिक्षकों के पे-पैकेज के संदर्भ में संबंधित हितधारकों से इंटरैक्ट करेगी और उनके द्वारा उपलब्ध कराये गये तथ्यों पर विचार करेगी। इस क्रम में सभी हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए जाते हैं।

आदेश के आलोक में इच्छुक हितधारक 15/02/18 तक अपना सुझाव मुख्य सचिव बिहार को संबोधित करते हुए निम्न पते पर भेज सकते हैं – पत्राचार का पता – मुख्य सचिव, बिहार, द्वारा सचिव, शिक्षा विभाग, विकास भवन नया सचिवालय ;बेली रोड ; पटना- 800015, इसके साथ विभाग द्वारा ई मेल- [email protected] जारी किया गया है तथा टेलीफोन नंबर- 0612- 2215181 है।

सरकार के इस फैसले के आलोक में संघर्ष समिति का जो सर्वसम्मत फैसला न्यूज़ बिहार को प्राप्त हुआ है वो यह है, ध्यान रहे कि इस सुझाव में बस एक ही सुझाव हो कि जो माननीय उच्च न्यायालय पटना का निर्णय है उसको हू-ब-हू सरकार लागू करे। संघर्ष समिति ने सभी से कहा है कि इस संदर्भ में हमलोग केवल और केवल एक सुझाव ही भेजें न कि लंबी-चौड़ी मांग पत्र। आप सभी हितधारकों से यह निवेदन है कि केवल और केवल एक ही सुझाव दें, माननीय उच्च न्यायालय पटना का आदेश सरकार लागू करे। ताकि सरकार पर भी इस सुझाव का सकारात्मक प्रभाव पड़े। अब देखना होगा कि इस समान काम समान वेतन मामले पर अंतिम फैसला किया होता है।

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