न्यूज़ बिहार डेस्क: बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी गुवाहाटी में आयोजित जीएसटी कौंसिल की बैठक में शामिल हुए।बैठक में 28 प्रतिशत टैक्‍स स्‍लैब में शामिल 177 उपभोक्‍ता वस्‍तुओं पर कर की दर 18 प्रतिशत कर दिया गया। बैठक में शामिल होने के बाद सुशील मोदी ने ट्वीट कर कहा कि बिहार की मिठाई खाजा, अनारसा पर अब मात्र 5 प्रतिशत टैक्‍स हो गया है। उनके इस ट्वीट पर लोगों ने रिट्वीट करते हुए कहा कि टैक्स फ्री करो न उपमुख्यमंत्री साहब।

जीएसटी काउंसिल की बैठक में उपभोक्‍ताओं के व्‍यापक हित में फलाई ऐश ब्रिक, फ्लाई ऐश, बिहार की प्रसिद्ध मिठाई खाजा, अनारसा और चिकी पर कर की दर 18 से घटना कर 5 प्रतिशत तथा पास्‍ता, कॉटन और जूट हैंडबैग पर 12 प्रतिशत कर दिया गया।इसके अलावा डेढ़ करोड़ तक के टर्न ओवर वाले कारोबारियों को जीएसटी आर 2 और 3 से छूट देते हुए चालू वित्‍तीय वर्ष के अंत तक केवल त्रैमासिक विवरणी और जीएसटी आर-1 दाखिल करने की सुविधा दी गई मगर उसे संक्षिप्‍त विवरणी 3 बी उन्‍हें प्रति माह भरना होगा।

कौंसिल के सभी सदस्‍यों को धन्‍यवाद देते हुए सुशील मोदी ने कहा कि कर कर दर घटनाने से देश को करीब 20 हजार करोड़ राजस्‍व की कमी होगी, जिसे प्रभावी कर संग्रह द्वारा पूरा किया जायेगा। उपभोक्‍ताओं को लाभ पहुंचाने के लिए कांग्रेस की बयानबाजी के बावजूद राजनीति से उपर उठकर यह निर्णय लिया गया है।

मोदी ने बताया कि प्‍लाईवुड, वाश बेसिन, सेनिटरी व गृह निर्माण से जुड़े , वैक्‍यूम फलॉश आदि घरेलू उपयोग की वस्‍तुओं पर अब 28 की जगह 18 प्रतिशत कर लगेगा। इसके अलावा जीएसटी फिटमेंट कमिटि ने 62 और वस्‍तुओं पर कर की दर कम करने की अनुशंसा की थी, उनमें 12 और नये वस्‍तुओं को शामिल किया गया है। इनमें चॉकलेट, सैम्‍पू, डिटरजेंट पाउडर, मार्बल और सौन्‍दर्य प्रसाधन की सामग्री शामिल है।

इसके साथ मोदी ने ट्वीट कर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मोबाइल एप सर्वेक्षण में 93 फीसद लोगों ने माना कि नोटबंदी कालेधन पर असरदार प्रहार साबित हुई। कश्‍मीर में सुरक्षा बलों पर पत्‍थरबाजी की घटनाएं 75 प्रतिशत कम हो गई और वापपंथी उग्रवाद से जुड़ी हिंसा में 20 फीसद से ज्‍यादा कमी आई। नोटबंदी के बाद म्‍यूचुअल फंड में निवेश 147 प्रतिशत बढ़ा और एलआइसी का प्र‍ीमियम जमा करने में 45 फीसद वृद्धि हुई।

सुमो ने आगे कहा कि लालू प्रसाद के 15 साल के शासन में सिंचाई की उपेक्षा और मजदूरों के महापलायन से चौपट हो चुकी खेती-किसानी को नवजीवन देने के लिए एनडीए सरकार ने 2008 में पहला कृषि रोडमैप लागू किया था। 10 साल पहले जहां मात्र 4.96 लाख हेक्‍टेयर में सब्जियां उगायी जाती थीं, वहीं अब किसानों ने 8.26 लाख हेक्‍टेयर में खेती कर राज्‍य को सब्‍जी उत्‍पादन मामले में तीसरे स्‍थान पर पहुंचा दिया है। एनडीए की सरकार ही अब 1.54 लाख करोड़ रूपये से तीसरा कृषि रोडमैप लागू कर रही है।

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