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मधुबनी | बाल विवाह व बाल व्यापार के प्रति न केवल ये लोगों को जागरूक कर रही हैं वरन जहां कहीं भी बाल विवाह हो रहा होता है और इसकी सूचना मिलती है तो वहां अपनी टीम के साथ पहुंच कर उसे रोकने का काम करती हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं मधुबनी शहर के मीना बाजार स्थित सर्वोप्रयास संस्था की सचिव निर्मला की जो गत 15 सालों से यह मुहिम चला रही हैं।

15 सालों से कर रही काम

बकौल निर्मला हमारी संस्था बाल विवाह व बच्चों के व्यापार पर गत 15 सालों से काम कर रही है। इसके परिणाम भी सार्थक रहे हैं। बताती हैं कि अभीतक करीब 40 ऐसे बाल विवाह को हम रोकने में सफल हो चुकी हैं। निर्मला बताती हैं कि ‘सर्वोप्रयास’ संस्था दरभंगा की 35 पंचायत, मधुबनी जिले के पंडौल प्रखंड की सात, बिस्फी की सात एवं राजनगर की सात पंचायतों में यह मुहिम चला रही है।

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जागरूकता अभियान :

निर्मला के मुताबिक अभीतक इन गांवों में एक हजार से अधिक जागरूकता अभियान चलाया जा चुका है, जिसमें बाल विवाह से होने वाली हानि पर महिलाओं को जागरूक किया गया है। निर्मला अफसोस जताती हैं कि महिलाएं आज भी लड़की को बोझ मानती हैं। वे लड़की की शादी कम उम्र में कराकर इस दायित्व से मुक्त होना चाहती है। वह यह नहीं जानती कि कम उम्र में शादी कर देने से उसे ¨जदगी भर लड़की के भविष्य व शारीरिक दुर्बलता से रूबरू होना पड़ेगा। हमने जब जागरूकता अभियान चलाकर इनसब बातों की जानकारी देनी चाही तो शुरू में इसका महिलाएं विरोध करने लगी। हम हिम्मत नहीं हार कर जागरूकता अभियान चलाते रहे। जिसके परिणाम सार्थक आए। इसमें भी बदलाव का कारण वैसी लड़कियां बनीं जिन्होंने जागरूकता अभियान में शामिल होकर कम उम्र में होने वाली शादी के दुष्परिणाम को जाना था। अब तो वैसी लड़की जिसे कम उम्र में अभिभावक शादी करना चाहते हैं विरोध कर देती हैँ। विपरीत परिस्थिति में हमारे टॉल फ्री नंबर 1098 पर हमें सूचना देती हैं। जिस पर हमारी टीम वहां पहुंच कर उस शादी को रुकवा देती है। इसमें सरकारी अधिकारी मसलन एसडीओ, पुलिस, बाल संरक्षण विभाग की भी मदद हम लेती हैं। गांवों में बाल संरक्षण समिति निर्मला ने बताया कि इस मुहिम को तेज करने के लिए हमारी संस्था गांव-गांव में बाल संरक्षण समिति का गठन कर उसके माध्यम से बाल विवाह व बाल व्यापार पर नजर रखती है। गांवों में टीम बन जाने के कारण हमें इन दोनों मामले में काफी मदद मिलती है। कई बार हमें जान से मारने की धमकी व सामाजिक विरोध का सामना करना पड़ता है।

बच्चों को बचाने की मुहिम :

अभी तक सौ बच्चों को बाल व्यापार का शिकार होने से बचाने का काम किया है। पांच साल पहले मलंगिया गांव से लापता दो बच्चों को हमने तत्कालीन एसपी सौरभ कुमार के सहयोग से एक झाड़ी से बरामद कर परिजनों के सिपुर्द किया था। चंद माह पहले ही बाबूबरही से एक पांच वर्षीय बच्चा को बरामद किया, जिसे एक महिला ने मधुबनी रेलवे स्टेशन से उठा लिया था। इस बच्चे उसके परिजन को सिपुर्द कर दिया गया है।

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‘बाल विवाह या बच्चों के व्यापार से संबंधित जानकारी इन लोगों से मिलते ही पुलिस सक्रिय हो जाती है। हम आम लोगों को भी इस प्रकार की जानकारी देने की अपील करते हैं, जिससे इस कुप्रथा को रोका जा सके।’

— दीपक बरनवाल, पुलिस अधीक्षक

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