कैंसर जानलेवा है, महिलाओं में गर्भाशय कैंसर के रोकथाम के प्रति केंद्र सरकार हर स्तर पर काम कर रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री अश्विनी कुमार चौबे ने आज एसोचैम द्वारा आयोजित राष्ट्रीय गर्भाशय कैंसर कांग्रेस का उद्घाटन नई दिल्ली में किया। श्री चौबे ने अपने उद्बोधन में कहा कि एसोचैम ने एक अति महत्वपूर्ण राष्ट्रीय समस्या, गर्भाशय के कैंसर पर सम्मेलन आयोजित किया है और सर्विकल कैंसर के निदान के लिए राष्ट्रीय जागृति निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है ।

केंद्रीय स्वास्थ्य राजमंत्री ने कहा की महिलाएं राष्ट्र की धुरी है और उनके स्वास्थ्य का सीधा प्रभाव राष्ट्र के विकास पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि खराब स्वास्थ्य होने के कारण महिलाओं द्वारा कम वजन वाले अस्वस्थ शिशुओं को जन्म देने की संभावना रहती है और न ही उनकी समुचित देखभाल एवं पोषण हो सकता है।

अस्वस्थ महिलाओं का परिवार की मनोदशा और आर्थिक स्थिति पर असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि गर्भाशयकैंसर के कई कारण हो सकते है। जैसे एचआईवी संक्रमण, असुरक्षित यौन संबंध, अस्वस्थ जीवन शैली इत्यादि । उन्होंने कहा कि आंकलन के अनुसार भारत में 3.8 मिलियन अर्थात् 38 लाख लोग कैंसर से ग्रस्त पाए गए तथा इनमें से दो-तिहाई लोग अंतिम चरण तथा नाइलाज स्तर पर पाए गए।

हर वर्ष भारत में इस बीमारी के कारण लगभग 7 लाख मौतें होती है।  कैंसर से पीड़ित इन रोगियों में से 60 प्रतिशत से अधिक रोगी अपने जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव 35 से 65 वर्ष की आयु में होते है। उन्होने कहा कि यदि गर्भाशयकैंसर का समय पर जांच करके पता लगाया जाए तो इसका उपचार संभव है और महिलाएं लंबे समय तक जीवित रह सकती है और अच्छा जीवन जी सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि समय पर जांच करके उपयुक्त उपचार से गर्भाशयकैंसर के मामलों में कमी आई है।

भारत सरकार राष्ट्रीय आरोग्य निधि के माध्यम से 27 क्षेत्रीय कैंसर सेन्टर्स को वित्तीय सहायता दे रही है ताकि गरीब लोगों का निःशुल्क इलाज हो सके। इसके अतिरिक्त, 65 मेडिकल कालेजों में उपचार की व्यवस्था है। राज्य सरकारों को कैंसर उन्मूलन के लिए हर वर्ष समुचित आर्थिक सहायता दी जाती है ।

इस अवसर पर उन्होंने कारपोरेट सेक्टर से आग्रह किया कि उनका यह सामाजिक दायित्व है कि वे अपने लाभ का कुछ अंश कैंसर जैसे गंभीर बीमारी को रोकने के लिए राष्ट्रीय आरोग्य निधि में अपना बहुमूल्य योगदान दे तथा पीपीपी माडल में इसके उपचार के लिए अस्पताल एवं मोबाइल बैंक चलाने में देश के गरीब लोगों की चिकित्सा में अपना योगदान दे सके । विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल व देश के वह क्षेत्र जहां कैंसर के सबसे ज्यादा रोगी है ।

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