जी हाँ, आज हैं आपको एक ऐसे गेम के बारे में बताने जा रहे है जो युवा को टारगेट करते है और उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाते है।इस गेम का नाम है “ब्लू व्हेल चैलेंज गैम” , ऐसा इंटरनेट “खेल” जिसमें इस खेल को डाउनलोड करके खेलने वाले को एक निश्चित अवधि तक खेल के डेवेलपरों के समूह द्वारा एक टास्क करना होता है यह टास्क एक श्रृंखला मे होते हैं जिसमें खिलाड़ियों को करने लिये 50-दिन की अवधि में कई कार्य आवंटित किया जाता है, जिसकी अंतिम चुनौती में खिलाड़ी को आत्महत्या करने को कहा जा सकता है ।2016 में रूस में, ब्लू व्हेल किशोरों के बीच बड़े पैमाने पर उपयोग करने के बाद एक पत्रकार ने एक लेख के माध्यम से सारी दुनिया का ध्यान इस ओर आकर्षित किया और इस खेल से जुडे एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया और उसे कम से कम 16 किशोर लड़कियों को “आत्महत्या करने के लिए उकसाना” का दोषी ठहराया गया। इस खेल को रूस के एक 22 वर्षीय युवा ने 2013में ऐसे टीनएजर्स की तलाश में बनाया जो अकेला महसूस करते थे और सबसे अलग थलग थे |

उन टीनएजर्स को अलग अलग टास्क दिए और हर टास्क को करने के बाद इस खेल को खेलने वाले को अपने हाथ में ब्लेड से एक निशान बनाना होता था और अंतिम टास्क तक आते आते सारे निशान जुड़कर एक व्हेल की तस्वीर बन जाते हैं और आखिरी टास्क के रूप में होती है आत्महत्या। यह एक ऐसा चैलेंज गेम है जो एक छिपी हुई कम्युनिटी द्वारा ऑपरेट किया जा रहा है जिसमें “टोर ब्राउज़र ” का प्रयोग किया जाता है। टोर वह ब्राउज़र है जो डार्क वेब में प्रयोग किया जाता है जैसे इसका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग, सट्टे, साइबर फ्रॉड को अंजाम देने में क्या जाता है। जिसमें आप अपनी आईपी अड्रेस को को गुप्त रख सकतें हैं। अब तक रूस और यूके में इस खेल की वजह से लगभग सौ से ज्यादा बच्चे अपनी जान गँवा चुके हैं। इस खेल का टारगेट वह बच्चे होते हैं जो अकेलापन महसूस करते हैं।जिनके माता-पिता उन्हें समय नहीं दे पाते और जो कहीं न कहीं हीन भावना का शिकार हो जाते हैं। उन्हें लगता है कोई उनसे प्यार नहीं करता, सब उसका मज़ाक उड़ाते हैं, कोई उन्हें नहीं समझता। ऐसे बच्चे पहले तो धीरे-धीरे मौन हो जाते हैं, बाहर निकलना, दोस्तों से मिलना जुलना छोड़ देते हैं, खुद को वर्चुअल दुनिया में डुबा लेते हैं और ज़िन्दगी की बोरियत को दूर करने के लिए ऐसे खेल में शामिल हो जाते हैं |

भारत जैसे देश में जहाँ इंटरनेट तेजी से पैर पसार रहा है हम अपने बच्चों को इंटरनेट के भरोसे नहीं छोड़ सकते |माता –पिता की यह जिम्मेदारी है कि वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें और प्रतिदिन कुछ वक्त उनके साथ जरुर बिताएं |

अगर  हाथ-पैर पर चोट या किसी ख़ास क़िस्म का निशान देखें, तो गंभीरता से लें। उन्हें अकेले न रहने दें। असल में ब्लू व्हेल जैसे खेल अकेलेपन से ही पैदा होते हैं।अभी एक दिन पहले ही केरल में भी ऐसा ही आत्महत्या का मामला सामने आया. त्रिवनन्तपुरम में भी पहले ऐसा ही मामला सामने आया था. केरल में बढ़ते हुए ऐसे केसों की वजह से वहां के मुख्यमंत्री ने सेंट्रल गवर्नमेंट से अनुरोध किया था कि वो सोशल मीडिया से इस गेम के लिंक को हटवाए, जिसके बाद सरकार ने गूगल फेसबुक, इंस्टाग्राम और याहू को इस लिंक को हटाने के लिए कहा है.
वेस्ट बंगाल और दिल्ली में भी इस तरह की वारदात सामने आ चुके हैं. पुलिस का कहना है कि ये सभी मौतें ब्लू वेल चैलेंज की वजह से हुई हैं, इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन परिजनों और दोस्तों के बयान के मुताबिक़ ये लोग इस ऑनलाइन गेम्स खेलते थे और डिप्रेशन में थे. अगर आप भी किसी ऐसे शख्स को जानते हैं जो इस तरह की हरकत कर सकता है, तो कृप्या उसको इस पागलपन का हिस्सा ना बनने दें. उसके परिजनों से बात करें और कहें कि किसी भी ट्रेंड को फॉलो करना ज़रूरी नहीं होता है, क्योंकि अपनी जान और ज़िन्दगी से बढ़कर कुछ भी नहीं है.

सरकार ने भी कड़े कदम उठाते हुए तमाम वेबसाइटों से इस ‘सुसाइड गेम’ के लिंक हटाने को कहा है।अब देखना ये है कि  क्या सचमुच इन लिंक्स को सोशल मीडिया पर से हटाया जाएगा?  ब्लू व्हेल खेल से जुड़ने वाले लोगों को इससे बचाने के लिए और क्या उपाय किये जाने चाहिए नीचे कमेन्ट बॉक्स में जरुर बताएं |