बिहार प्रदेश युवा कांग्रेस महासचिव मंजीत आनन्द साहू ने केंद्रीय मन्त्रीमण्डल में एक भी अत्यंत पिछड़े को शामिल नहीं करने पर कहा है की एक ओर जहां भाजपा और केंद्र सरकार अतिपिछड़ा के हिमायती होने का राग अलापती है वहीं केंद्रीय मन्त्रीमण्डल में एक भी अतिपिछड़े वर्ग के नेता को मंत्री नहीं बनाया जाना एक बड़ी संख्या वाले वर्ग की भाजपा द्वारा उपेक्षा को दर्शाता है . भाजपा की जनविरोधी नीतियां स्पष्ट करती है कि बीजेपी के एजेंडे में गरीब कमज़ोर अतिपिछड़े नहीं हैं . 



श्री साहू ने कहा कि भाजपा और इनके सहयोगी दल हाल ही में हुए राजद की रैली में अतिपिछड़े नेताओं की उपेक्षा का आरोप लगाकर अतिपिछड़े के हितैषी होने का ढोंग कर रहे थे. अतिपिछड़ा वर्ग जिसकी आबादी करीब चालीस फीशदी है वे भाजपा के दोहरे चरित्र को समझ चुकी है. सबका साथ और महज़ कुछेक खास जाति वर्ग का विकास भाजपा की नीति है . आने वाले दिनों में अतिपिछड़ा समाज भाजपा और नरेंद्र मोदी के झांसे में नहीं आने वाला है. बिहार के उपमुख्यमंत्री शुशील मोदी जवाब दें कि आधे दर्जन से ज्यादा बिहार से केंद्रीय मंत्री हैं लेकिन इसमें कोई भी वैश्य समुदाय से क्यो नहीं है ? क्या आने वाले समय मे भाजपा को वैश्य समुदाय के वोट की दरकार नहीं है ? क्या नोटबन्दी और जीएसटी की घोर विफलता के कारण भाजपा को एहसास हो चुका है कि आने वाले दिनों में वैश्य समुदाय भाजपा का पुरजोर विरोध करने वाली है . सर्वविदित है कि नोटबन्दी और जीएसटी लागू होने से छोटे व मध्यम व्यवसायियों के व्यापार के ऊपर नकारात्मक प्रभाव पड़ा और नतीजतन कई छोटे व मध्यम व्यवसाय या तो बन्द हो गए या उनकी कार्यक्षमता खत्म हो चुकी है . इससे बिहार भर के और देश भर के व्यवसायियों में नरेंद्र मोदी और भजपा के प्रति रोष है .