जब कोई आपदा आ पड़े तो धैर्य धारण करने में समझदारी है। हिम्मत से काम लें, सही सोचें और संकट से पहले ही उबरने के उपाय करें। अगर कोई विपत्ति आ ही जाए तो पेश हैं कुछ हिदायतें कि क्या करें और क्या न करें।



बाढ़

1. उन ऊँची जगहों की पहचान करें जहाँ आप बाढ़ के समय पनाह ले सकते हैं।
2. जब तक बहुत जरूरी न हो, बाढ़ के पानी में न घुसें। पानी की गहराई का पता करें और किसी लाठी से जमीन की मजबूती मालूम कर लें। जहाँ बिजली के तार गिरे हों, उधर मत जाएँ।
3. अपनी गैस और बिजली की सप्लाई बन्द कर दें। बिजली के उपकरणों का स्विच बन्द कर दें।
4. बाढ़ के बाद अक्सर जल जनित रोग फैलते हैं। उनसे बचने के उपाय करें।

5. अफरा-तफरी न मचाएँ, शान्त रहें, अधिकारियों/प्राधिकृत स्रोतों के निर्देशों का पालन करें, अफवाहों पर ध्यान न दें। परिवार के लिए पहले से ही एक आपातकालीन योजना बनाएँ और यह भी सुनिश्चित करें कि परिवार के हर सदस्य को इसकी जानकारी हो। घर से निकलने के दो रास्ते बनाएँ। यह तय कर रखें कि अगर परिवार के लोग बिछड़ गए तो कहाँ मिलेंगे। एक समान सम्पर्क व्यक्ति या परिवार का नाम तय कर लें। सुनिश्चित करें कि परिवार का हर सदस्य आपातकालीन सम्पर्क नम्बर जैसे— पुलिस, अस्पताल, एम्बुलेंस, अग्निशमन सेवा, आतंक विरोधी दस्ते आदि के बारे में जाने और उसे यह भी मालूम हो कि इन्हें मदद के लिए कैसे बुलाया जाता है।


6. एक आपातकालीन किट हमेशा तैयार रखें। इसमें प्राथमिक चिकित्सा सामग्री, सूखे मेवे जो जल्दी खराब न हों, पानी शुद्ध करने वाली टिकिया, चादरें, बच्चे-बूढ़ों की जरूरत की चीजें, चाकू सहित उपयोगी औजार, बैटरी, टॉर्च, स्क्रू ड्राइवर, रस्सी, गोन्द वाले टेप और बैटरी से चलने वाला रेडियो शामिल हो।

7. परिचय वाले कागजात, वित्तीय दस्तावेज, जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट आदि एक स्थान पर सुलभ रखें। यह भी उपयुक्त होगा कि ऐसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों की प्रमाणित फोटो प्रतियाँ किसी वैकल्पिक स्थान पर अथवा भरोसेमन्द मित्र/सम्बन्धी के पास रखें।

8. परिवार के वयस्क सदस्यों को बुनियादी प्राथमिक चिकित्सा और कृत्रिम श्वास देने के काम में प्रशिक्षण दिलाना उपयुक्त रहेगा।

9. चौकस रहें और अपने आसपास के पीड़ितों की हर सम्भव सहायता करें। ऐसा कुछ भी न करें जिससे राहत और बचाव कार्यों में बाधा पैदा हो।