नीतीश कुमार से संबंधित यह खबर जिसने राजनीतिक गलियारे में हलचल मचा रखा है आप भी चौंक जाएंगे। नीतीश कुमार से जुड़ी यह ख़बर जिसे सुनकर आप भी अचंभित हो जाएंगे। खबर है कि एक बार फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दे सकते है इस्तीफा। जदयू के विश्वस्त सूत्रों से जानकारी मिल रही है कि अंदर ही अंदर इस बात के लिए नीतीश कुमार ने मन बना लिया है। चर्चा है कि विधानसभा का कार्यकाल 2 साल पहले ही खत्म कर नीतीश इस्तीफा दे देंगे। सूत्रों की मानें तो लोकसभा के साथ ही विधानसभा चुनाव में उतरने की योजना पर फैसला अंतिम दौर में है।


जिस तरह की चर्चा है उसके अनुसार बिहार की सत्ता पर काबिज़ एनडीए की सीनियर पार्टनर जनता दल यूनाइटेड तय समय-सीमा से दो साल पहले ही यानी 2019 मे विधान सभा चुनाव कराने को तैयार है। इस आशय से जुड़ी खबर चर्चा में तब आई जब सोमवार 08 जनवरी को पार्टी के महासचिव के सी त्यागी ने कहा कि उनकी पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विचार से सहमत है कि देश में लोकसभा और विधान सभाओं के चुनाव एक साथ होने चाहिए। जदयू के विश्वस्त प्रतिनिधि के सी त्यागी के बयान के बाद से इस बात को लेकर चर्चा जोरों पर है।

के सी त्यागी ने आगे कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही प्रधानमंत्री के लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराने के विचार को ‘बहुत अच्छा प्रस्ताव’ कह चुके हैं। त्यागी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लगता है इससे देश में चुनावी माहौल का एक बार वातावरण बनेगा तथा खर्च और वक्त की भी बाचित होगी। लोकतंत्र के लिए यह जरूरी है कि लोगों में चुनाव के प्रति सोच और उत्सुकता कायम रखा जाए। हर राजनीतिक दल की यह जिम्मेवारी भी है। चुनाव प्रक्रिया सरल और एक उत्सव के रूप में मनाया जाए इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है।

जब के सी त्यागी से पूछा गया कि क्या जदयू समय पूर्व चुनाव के लिए तैयार है तो उनका कहना था कि 2018 के नवंबर-दिसंबर में देश के तीन बड़े राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इनके अलावा तीन बड़े राज्य तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा विधान सभा का कार्यकाल साल 2019 में लोकसभा के कार्यकाल के साथ पूरा हो रहा है। विचार किया जा रहा है कि इन सभी राज्यों के चुनाव 2018 दिसंबर में एक साथ कराए जा सकें। अगर इस बात पर एक राय कायम होती है तो विधानसभा के बचे दो साल के कार्यकाल से पहले ही नीतीश सरकार भी चुनाव में जाना पसंद करेगी।

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि 2015 में संपन्न हुए चुनाव में एनडीए और महागठबंधन में सिफा सीधा टक्कर हुआ था। इस चुनाव में महागठबंधन को बड़ी भारी सफलता मिली थी। पर दो साल से पूर्व ही यह महागठबंधन टूट गया और नीतीश कुमार ने भाजपा के साथ मिल कर एनडीए की सरकार बनाया। इस 2015 के विधान सभा चुनाव में महागठबंधन को कुल 243 सीटों में 178 सीटें मिली थीं। इन सीटों में लालू प्रसाद की पार्टी राजद को 80, नीतीश की जदयू को 71 और कांग्रेस के खाता में कुल 27 सीटें आई थीं। जबकि बीजेपी को 53 सीटें और एनडीए में उनके सहयोगी दलों को मात्र पांच सीटें मिली थीं।

महागठबंधन की सरकार के मुखिया नीतीश कुमार ने मात्र 20 महीने में जुलाई 2017 में इस्तीफा दे दिया। और फौरन ही बीजेपी के सहयोग से एनडीए सरकार के मुख्यमंत्री के रूप ने शपथ लिया। फिलहाल जदयू बीजेपी की सहयोगी पार्टी है और प्रदेश में एनडीए की सरकार है। काफी समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हवाले से भाजपा और उसकी सहयोगी दलों के माध्यम से यह बात सामने आई है की लोकसभा और विधानसभा का चुनाव एक साथ कराया जाए। इसमें नीतीश कुमार ने भी पहल करते हुए समर्थन दिया है। पर राजनीति में कब क्या हो इसका पूर्वानुमान करना थोड़ा मुश्किल है। अब देखना होगा कि उड़ती हुई ये ख़बर हक़ीक़त बनती है क्योंकि दो साल सत्ता सुख त्यागना शायद महंगा सौदा लगे। जुड़े रहिये न्यूज़ बिहार के साथ हम आपको हर उस खबर से बाख़बर रखेंगे जिनसे आपका सरोकार है।

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