मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक नया खुलासा करते हुए कहा कि भागलपुर में सरकारी खजाने के पैसे को काफी तेजी से फर्जी व्यवसाय के माध्यम से दूसरी जगह ट्रांसफर किया जा रहा है. यह छोटा-मोटा मामला नहीं, बल्कि 250 से अधिक करोड़ का फर्जीवाड़ा है.

सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड और बैंकों द्वारा गबन की गयी सरकारी राशि बढ़ कर लगभग 295 करोड़ हो गयी है. मंगलवार को इंडियन बैंक की मिलीभगत से सृजन के खाते में फर्जी तरीके से जमा की गयी राशि में 10.26 करोड़ के गबन की बात सामने आयी थी. बुधवार को एक और गबन का मामला सामने आया.

पता चला है कि भू-अर्जन विभाग के खाते से 270 करोड़ रुपये सृजन के खाते में बैंक की मिलीभगत से ट्रांसफर कर दिये गये. इसके अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा की आरपी रोड स्थित शाखा से जिला नजारत के खाते से 14.39 करोड़ रुपये गायब हैं. यानी कुल मिला कर यह गबन लगभग 295 करोड़ का हो गया है. इस संबंध में डीएम के निर्देश पर कोतवाली थाने में बुधवार को भी भू-अर्जन पदाधिकारी व नाजिर की शिकायत पर सृजन, इंडियन बैंक और बैंक ऑफ बड़ोदा पर दो और मामले दर्ज किये गये.

उधर मुख्यमंत्री के निर्देश पर मामले की जांच के लिए आर्थिक अपराध इकाई (इओयू) के आइजी जेएस गंगवार के नेतृत्व में विशेष टीम हेलीकॉप्टर से बुधवार की दोपहर भागलपुर पहुंची. सर्किट हाउस में मामले की जांच शुरू हुई और देर रात तक सृजन के मैनेजर व कर्मी और बैंक अधिकारियों से पूछताछ की गयी.

सृजन की कई महिला पदाधिकारियों से भी पूछताछ की गयी. उनसे सृजन में बैठकी करने वालों के नाम भी पूछे गये. इस दौरान भागलपुर जोनल आइजी सुशील मानसिंह खोपड़े, रेंज डीआइजी विकास वैभव, डीएम आदेश तितरमारे, एसएसपी मनोज कुमार, भागलपुर जिले में पदस्थापित कहलगांव डीएसपी रामानंद कौशल, लॉ एंड ऑर्डर डीएसपी राजेश सिंह प्रभाकर, सिटी डीएसपी शहरयार अख्तर और कई अन्य पुलिस पदाधिकारी मौजूद रहे.

भागलपुर में सरकारी योजनाओं के पैसे जिला ट्रेजरी एकाउंट से निकाल कर सरकार के शॉर्ट टर्म एकाउंट में ट्रांसफर किये जाते थे, ताकि योजनावार समय-समय पर इससे रुपये निकाले जा सकें.

लेकिन, पिछले तीन-चार महीने से इन खातों के लिए निकाले गये दर्जनों सरकारी चेक बाउंस या डिजऑनर होने लगे, तब पूरे मामले का खुलासा हुआ. अब तक की जांच के आधार पर इस मामले में तीन एफआइआर दर्ज हो चुकी है. इसके अनुसार, तीन जिला ट्रेजरी एकाउंट से करोड़ों रुपये छह निजी बैंक एकाउंट में ट्रांसफर हुए हैं, जो सृजन एनजीओ के ही हैं

ये सभी एकाउंट इंडियन बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के हैं. यह गड़बड़ी वर्ष 2008-09 से ही चली आ रही थी. इसके तहत भागलपुर जिले में भी अन्य जिलों की तरह ही करीब सभी योजनाओं के रुपये जिला ट्रेजरी खाते में ट्रांसफर किये जाते थे. इनमें भू-अर्जन, नगर विकास, समाज कल्याण समेत अन्य विभागों की योजनाएं शामिल हैं.

फिर इन रुपयों को कुछ-कुछ मात्रा में निकाल कर ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स समेत कुछ अन्य बैंकों में मौजूद सरकारी शॉर्ट टर्म एकाउंट में ट्रांसफर होते थे, ताकि ठेकेदार या अन्य स्तर पर योजनाओं के रुपये खर्च किये जा सके. लेकिन, ये रुपये इन एकाउंट से फर्जी हस्ताक्षर या अन्य तरीके से एनजीओ के निजी एकाउंट में ट्रांसफर हो जाते थे. रुपये को धीरे-धीरे कई चरणों में ट्रांसफर किया जाता था, ताकि यह चालाकी किसी के सामने नहीं आये.

मनोरमा की मौत के बाद उजागर हुआ मामला

सृजन एनजीओ की संचालिका मनोरमा देवी की मौत फरवरी, 2017 में हो गयी. इसके बाद से अचानक सरकारी एकाउंट्स से विभिन्न योजना मद में पेमेंट के लिए काटे गये सभी चेक बाउंस होने लगे. शुरुआत में एक-दो चेक बाउंस हुए, लेकिन जब सभी चेक बाउंस होने लगे, तब यह मामला उजागर हुआ.

पता चला कि शॉर्ट टर्म एकाउंट में जमा सभी रुपये किसी निजी एनजीओ के बैंक खाते में ट्रांसफर हो गये हैं और यह सिलसिला वर्षों से चला आ रहा है. शुरुआती जांच में अब तक यह मामला लगभग 295 करोड़ का सामने आ चुका है. इसके 500 करोड़ के आसपास के पहुंचने की भी आशंका जतायी जा रही है.

इन सवालों के तलाशे जा रहे जवाब

– आखिर मनोरमा देवी की मौत के बाद ही यह मामला क्यों उजागर हुआ. चेक पहले बाउंस नहीं होते थे. मनोरमा की मौत के बाद ही चेक कैसे बाउंस होने लगे.

– यह घोटाला बैंक अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है. इसमें किस-किस रैंक के बैंक अधिकारी शामिल हैं. – पूरे मामले में सरकारी महकमे के अधिकारियों पर भी उंगली उठना लाजमी है. ऐसे में किस रैंक के अधिकारी या कर्मचारी इसमें शामिल हैं. सरकारी ट्रेजरी की भूमिका कहां तक इससे जुड़ी हुई है.

– वर्ष 2008 से यह गड़बड़ी चली आ रही है. नौ साल में दर्जनों डीएम वहां रहे, लेकिन किसी की पकड़ में यह कैसे नहीं आया.

– घोटाले के करोड़ रुपये का क्या हुआ, इनका निवेश कहां और किन-किन क्षेत्राें में किया गया हैं. इसमें बड़े राजदार कौन-कौन शामिल हैं.

राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने कहा कि भागलपुर में अवैध निकासी मामले की सीएम खुली जांच कराएं. सारा सच सामने आना चाहिए. दोषी जो भी हो, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए.

फिलहाल यह केवल एक जिले का मामला है. इसकी जांच जारी है और जल्द ही इसके नतीजे सामने आयेंगे. साथ ही उन्होंने बालू माफिया पर भी हमला बोला. वे बुधवार को पटना के ज्ञान भवन में बिहार पृथ्वी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे. इस दौरान मुख्यमंत्री ने ‘लालच भारत छोड़ो’ का नारा दिया. सीएम ने कहा कि बालू माफिया को जितना बालू खोदने का टेंडर मिलता है, उससे ज्यादा बालू निकालते हैं. इसमें धंधेबाजी हो रही है. यदि इसके खनन की सीमा दो मीटर या एक मीटर होती है, तो वे उससे ज्यादा खुदाई करते हैं. इसकी निगरानी करने वाले भी उनसे मिल जाते हैं. उन्होंने कहा कि बिहार में बहुत घोटालेबाज हो गये हैं. पता नहीं ये कहां-कहां से आ गये हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे महात्मा गांधी ने नौ अगस्त को कहा था कि ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो’, वैसे ही आपलोग भी कहिए ‘लालच भारत छोड़ो’. इसका कारण यह है कि पृथ्वी हमारी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है, लेकिन लालच को पूरा करने में सक्षम नहीं है. लालच में पड़ कर इसका दोहन करना खतरनाक है. वहीं, लालची प्रवृत्ति समाज से दूर होगी, तो यहां खुशहाली, प्रेम और भाईचारा का विकास होगा.