मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी के काफ़िले पर हुआ हमला निंदनीय है। हर तरफ़ इस घटना की निंदा हो रही, लेकिन पूरे घटनाक्रम पर नेता प्रतिपक्ष का बयान शर्मनाक है। लोकतंत्र में राजनीतिक मर्यादा की अपेक्षा की जाती है लेकिन आपके संस्कार उससे मेल नहीं खाते। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी के काफ़िले पर हमले के बाद नेता प्रतिपक्ष का रुख़ संदेह पैदा करता है। मुझे आशंका है कि क़ाफिले पर हमला तेजस्वी जी की मिलीभगत से हुआ।

आरजेडी नेता बिमलेश यादव ने 9 जनवरी को सोशल मीडिया पर धमकी दी कि वह डुमरांव में सीएम की यात्रा को सफ़ल नहीं होने देगा। बिमलेश ने अपने इस पोस्ट में नेता प्रतिपक्ष और पार्टी के अन्य नेताओं को भी टैग किया। ये वही बिमलेश यादव है, जो बीजेपी कार्यालय पर हुए हमले का सूत्रधार था। बिमलेश राजद युवा का महामंत्री है और DSS का उपाध्यक्ष है। राजनीति में हिंसक विरोधशैली को अपनाते हुए तेजस्वी यादव को चिंता नहीं हुई? परंतु मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बिहार के विकास की चिंता है। समीक्षा यात्रा का मक़सद ज़मीनी विकास को देखना है, इस साल 1 लाख 60 हज़ार करोड़ के बज़ट से बिहार विकसित करने का लक्ष्य है।


संजय सिंह ने कहा कि अब बिहार के सभी 39073 गांवों में बिजली पहुंच चुकी है। राज्य के प्रत्येक घर को इस साल के अंत तक मुफ्त बिजली कनेक्शन दिया जाएगा। बिजली संबंधी यह प्रयास ‘सुशासन के साथ निश्चय’ में शामिल थे । साल 2005 में सत्ता में आने के बाद से बहुत लंबी दूरी तय हो गई । उस समय छोटे शहरों और गावों ने बिजली पाने की आशा छोड़ दी थीं और यहां तक कि राज्य की राजधानी पटना में भी बिजली की स्थिति सुधरने की ज्यादा उम्मीद नहीं बची थी। लेकिन श्री नीतीश कुमार की इच्छाशक्ति ने आज बिहार को ‘लालटेन युग से एलईडी युग’ में लाया।

नीतीश कुमार सीएम बने। बिहार में बहार आयी। कानून व्यवस्था में बदलाव देखने को मिला। अपहरण उद्योग पूरी तरह से बंद हो गया। बड़े-बड़े अपराधी जिनके आतंक से लोग अपना घर-बार छोड़ चुके थे, वे जेलों में बंद दिखने लगे । जहां पहले गड्ढ़ों में सड़क थी, अब वहां सड़क से भी गड्ढ़े दूर हो गये। अब बिहार के किसी भी जिला से राज्य मुख्यालय, राजधानी आने में महज पांच घंटे लगते है । गांव के अस्पतालों में डॉक्टर नजर आने लगे।


नीतीश कुमार ने समाज के अंतिम पायदान के लोगों तक विकास पहुंचाने का काम किया। सोशल इंजीनियरिंग का वह फार्मूला विकसित किया, जिससे पिछड़ो और दलितों में अपनी पकड़ मजबूत की।नीतीश कुमार ही बिहार के सुशासन के प्रतीक है और बिहार की जनता जानती है कि नीतीश कुमार का शासन कैसा रहा है । श्री नीतीश कुमार के शासन प्रणाली के बदौलत विगत 12 वर्षो में बिहार सरकार ने जो नाम कमाया है, उसे बरकरार रखी हुई है । कानून का पालन ठीक से किया जा रहा है। सरकार के तरफ से कार्रवाई और अनुसंधान में किसी प्रकार का कोई भेदभाव नही किया जा रहा है, पिछले 12 वर्षों में सरकार ने कार्य संस्कृति का विकास किया है।
नीतीश कुमार को बिहार की सत्ता मिली तो उन्होंने उसे सार्थक बनाया। अपनी राजनीति को विकास से जोड़ा। श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार ने विकास की जो रफ़्तार पकड़ी है वो आज भी कायम है। नीतीश कुमार महात्मा गांधी, जेपी, कर्पूरी ठाकुर, लोहिया के बताए हुए रास्ते को अख्तियार किया है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के माध्यम से राज्य की बेटियों को शिक्षा दिया, पंचायत में महिलाओं को 50 फ़िशद अधिकार दिया, शराबबंदी किया, अब बाल विवाह और दहेज़ प्रथा के खिलाफ आंदोलन शुरू किया है। श्री नीतीश कुमार मर्यादा पुरुष है जो मान मर्यादा के साथ अपने गुरु और आदर्शो का भी मान बढ़ाया है। आज महात्मा गांधी ,जेपी, लोहिया , कर्पूरी की आत्मा नीतीश कुमार को आशीर्वाद देती होगी और इसी सबल के साथ नीतीश कुमार जनता के दरबार में हाजिरी लगाते है ।

जदयू के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह ने विकास समीक्षा -यात्रा से जुड़ी चंद पंक्तियां को भी दुहराया।

पूष की ठंडक तड़पाये , या देह जलाये कड़ी धूप ,
जनता का अभिनन्दन करने,निकल पड़ा है एक भूप ।
पहनावे की चमक दमक, न चकाचौंध की ठाट-बाट,
सत्ता- मद , न भेद-भाव है, न्यायपूर्ण है राजपाट ,
वाणी में मिसरी,स्वभाव में ,सादगी जिसका है स्वरुप।
जनता का अभिनन्दन करने, निकल पड़ा है एक भूप।

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