पटना के होटल मौर्या में एक निजी चैनल द्वारा आयोजित कार्यक्रम #RisingBihar में बिहार के कई दिग्गज नेताओं ने अपने विचार रखे हैं. बिहार के पूर्व शिक्षा मंत्री और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी ने इस कार्यक्रम के बारे में कहा कि यह एक सुंदर पहल है. मुझे इस कार्यक्रम में शामिल होने और विचार रखने का मौका मिला इसके लिए आयोजकों को बहुत बहुत शुक्रिया.

चौधरी ने हर एक सवाल का बड़े ही नपे तुले अंदाज में जवाब दिया. उन्होंने कहा कि आज के संभ्रात लोग यथार्थ को बनाये रखना चाहते हैं, लेकन दलित भी अपना अधिकार चाहते हैं. समानता हमारा उद्धेय है और लोकतंत्र में यही होना भी चाहिए.  उन्होंने उदाहरण दिया कि सनातन धर्म जाति नहीं सबकी बात करता है. जब पंडित जी पूजा कराने आते हैं तो कहते हैं कि धर्म की जय हो, विश्व का कल्याण हो, प्राणियों में सद्भावना हो. कहीं कोई जाति जमात या वर्ग की बात नही की जाती है.

इस कार्यक्रम में अशोक चौधरी ने मुख्य रूप से कास्टलेस सोसाइटी से अपनी चर्चा का शुरुआत किया. इसी मुद्दे पर अशोक चौधरी ने कहा कि बिहार में राजनीतिक रूप से कास्टलेस सोसाइटी बननी चाहिए. लोग अब धर्म और जात की राजनीति करते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि आसानी से सत्ता मिल जायेगा. लोग हिंदुत्व की बात कर के हिन्दू सेंटीमेंट्स को जगा कर सत्ता पर काबिज होना चाहते हैं.

इस कार्यक्रम में अशोक चौधरी से एक सवाल किया गया कि क्या नीतीश कुमार के अगले दलित चेहरा अशोक चौधरी होने वाले हैं? इस के जवाब में अशोक चौधरी ने श्याम रजक और उदय नारायण चौधरी का हवाला देते हुए कहा कि वह दोनों आलरेडी जदयू में काम कर रहे हैं, दोनों नेता अच्छे हैं और महादलित समाज से आते हैं. फिलहाल वो अपने समाज की बात सरकार के सामने रख रहे हैं. इसके साथ ही एक ऐसे समाज की परिकल्पना को साकार करने की इच्छा रखते हैं, जिसमे जातिय बंधन से मुक्त समाज और राजनीति का निर्माण हो.

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