बिहार के भोजपुर जिले का पीरो अपने सैनिक पुत्र की शहादत से गमगीन है। जम्मू कश्मीर के सुंजवां आर्मी कैंप पर हुए आतंकी हमले में पीरो निवासी अब्दुल खैर खान के पुत्र मोहम्मद माजिद जो CRPF की 49 वीं बटालियन में तैनात थे, शहीद हो गए हैं। जैसा कि आप सभी जानते हैं श्रीनगर के CRPF कैंप को निशाना बना कर आतंकियों ने हमला कर दिया था। सैनिक मस्जिद में आतंकियों के कोशिश को नाकाम तो जरूर कर दिया पर खुद शहीद हो गए। सुंजवां हमले में लश्कर-ए-तैयबा का हाथ है उसने जिम्मेवारी भी ली है।

न्यूज़ बिहार से हुई बातचीत में पीरों के युवा नेता व सामाजिक कार्यकर्ता मनोज उपाध्याय ने बताया कि इस शहादत से जहां क्षेत्र के सभी वर्ग के लोग हिंदू-मुस्लिम फक्र महसूस कर रहे हैं। वही अपने लाल को खोने से पूरा क्षेत्र दुखी है। सुंजवां की इस आतंकी घटना की खबर मिलते ही मोहम्मद माजिद के घर गए और उनके पिता और परिजनों से जाकर मिले।

crpf सूत्रों के द्वारा जो खुलासा किया गया है उसके अनुसार आतंकियों की मनसा सैनिकों को शिविर के अंदर घेरकर मारने की थी। CRPF प्रवक्ता के अनुसार शिविर के संतरी ने सुबह करीब 4:30 बजे दो संदिग्धों को पीठ पर बैग लटकाए और हाथों में हथियार लिए हुए देखा। उसने दोनों को ललकारा तथा उन पर तड़ातड़ गोलियां चलाई। प्रवक्ता के अनुसार तत्काल आतंकी वहां से भाग गए। आगे जाकर एक मकान में छुप गए उसके बाद crpf ने उन्हें घेर लिया। सुंजवां में भारी गोलीबारी के बीच जवान आतंकियों पर दबाव बना रहे थे। जिससे कि कोई भी आतंकी फरार ना हो पाए। इसमें CRPF के जवानों को कामयाबी मिली पर जवानों को कुर्बानी भी देनी पड़ी।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शनिवार की सुबह आतंकियों के साथ जम्मू के सुंजवां आर्मी कैंप पर हमले का यह ऑपरेशन 50 घंटे से ज्यादा वक्त तक चला। इस हमले में 5 जवान शहीद हो गए तथा एक नागरिक की भी मौत हो गई है। इसके अलावा 6 जवान समेत 12 अन्य लोग घायल भी हुए हैं। इस ऑपरेशन में जवानों द्वारा चार आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया है।

युवा नेता ने न्यूज़ बिहार को बताया कि जब वे शाहिद सैनिक मो० माजिद के पिता अब्दुल खैर खान से मुलाकात किये, एक तरफ तो उन्हें इस बात का फख्र था कि उनके बेटे ने देश की सीमा पर देश के दुश्मनों आतंकियों को मार गिराया है। वहीं उन्हें सरकार से काफी नाराजगी थी। माजिद के पिता खैर खान के साथ उनका परिवार तथा क्षेत्र के लोग अपने जांबाज बेटे के जाने से काफी दुखी है।

मनोज उपाध्याय ने कहा कि देश की स्थिति बेहतर नही है। कल तक आतंक और दुश्मनों को सबक सिखाने का दावा करने वाले लोगों ने कोई भी राह अखितयार नही किया जिसके नाम पर वो सत्ता में आये थे। सैनिको की लगातार जान जा रही है और प्रधानमंत्री जी विदेश दौरे पर है। पूर्व की सरकार को नसीहत देने वाले आतंकी और दुश्मनों की ईंट से ईंट बजाने की बात करने वाले आज हर मोर्चे पर फेल है।

मनोज उपाध्याय ने कहा कि वैसे तो इस बात को कहने का इस माहौल में कोई औचित्य नहीं है। हमारा भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश यही और यहां सभी एक बराबर और सभी राष्ट्रभक्त हैं। पर माहौल के अनुसार ये बताना जरूरी है कि आतंकियों से लोहा लेने वाला बिहार के पिरो का लाल एक मुसलमान था और सीमा की रक्षा में उसने अपनी शहादत हंसते हंसते दे दिया है। यह देश की सरकार और हिन्दू मुस्लिम की राजनीतिक आंच पर रोटियां सेंकने वालों के लिए एक सबक है। अभी भी वक्त है आतंकवाद और सीमा की रक्षा के मुद्दे पर पूरा देश एक है। राजनीति छोड़ कोई ठोस निर्णय ले सरकार क्योंकि अब नाहक सीमा पर अपने बहादुर सपूतों को खोने की हिम्मत नही है न हीं लाचारी में जान जाता देख सकता हैं।

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