पटना, बिहार में सरकार किसी की हो कोई भी शिक्षा मंत्री बने चर्चा में शिक्षा विभाग की खामियां और फैसले ही रहेंगे। पूर्व में शिक्षामंत्री रहे डॉ अशोक चौधरी ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पारदर्शी एवं व्यवस्था साफ सुथरी करने का प्रयास किया। पर शुरू से अंतिम दिन तक उन्हें विपक्ष घेरता रहा। अब जब नई सरकार में नए शिक्षा मंत्री आये हैं उनका पहले ही बयान से लोगों में नाराजगी है। विपक्ष से पहले पक्ष में बैठे लोग ही आलोचना करने लगे हैं।

भाजपा के एमएलसी नवल किशोर यादव ने कहा है कि दृढ़ निश्चयी व व्यक्तित्व के धनी, हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी की नजर शिक्षा विभाग पर पड़ी, माननीय मुख्यमंत्री जी के साथ साथ बिहार के शिक्षकों एवं 89% उन बच्चों और उनके अविभावकों को बधाई जो सरकारी विद्यालयों पर निर्भर है। अब बिहार में शिक्षा व्यवस्था दुरुस्त होना तय है, लेकिन सिर्फ शिक्षक ही क्यों ? शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सभी आला अधिकारियों एवं मंत्रियों के भी ट्रैक रिकॉर्ड की जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई हो। साथ ही बिहार के सभी क्षेत्र में अयोग्य और अक्षम अधिकारियों, पदाधिकारियों एवं कर्मियों की सफाई हो।

यादव आगे कहते हैं जिस प्रकार बिहार सरकार ने सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों को 50 वर्ष के बाद अक्षम घोषित करते हुए उन्हें जबरन सेवामुक्त कर देने का निर्णय लिया है। ऐसे में मैं सरकार से मांग करता हूँ कि सिर्फ शिक्षकों का ही क्यों बिहार में 50 वर्ष तक के सभी आईएएस अधिकारियों के भी जिले में किये गए कार्यों की समीक्षा हो, 50 वर्ष तक के आईपीएस अधिकारियों के भी बिहार में अपराध को रोकने में किये गए कार्यों की समीक्षा हो, 50 वर्ष बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के भी किये गए कार्यों की समीक्षा हो और तो और सभी विभागों में कार्य करने वाले मंत्रियों के रूप में राजनेताओं के द्वारा भी किये गए कार्यों की समीक्षा की जानी चाहिए। इसके साथ ही शिक्षकों को हटाने का निर्णय लेनेवालों को भी अपनी आत्म समीक्षा करनी चाहिए।

भाजपा एमएलसी नवल यादव ने अपनी ही सरकार को घेरते हुए कुछ ज्वलंत प्रश्न रखे हैं-

★बिहार में शिक्षकों को 7-8 महीने तक वेतन क्यों नही देते ?

★विद्यालयों में जहां 14 शिक्षकों की जरूरत है वहां 2 और 3 क्यों ?

★बच्चों को पढ़ने के लिए समय पर किताब क्यों नही ?

★बच्चों को बैठने केलिए बेंच डेस्क और पर्याप्त क्लास रूम क्यों नही ?

★विद्यालयों में पर्याप्त संख्या में शौचालय क्यों नही ?

★शिक्षकों से गैर शैक्षणिक काम क्यों लेते हैं ?

यादव ने उपरोक्त प्रश्नों के साथ सरकार के इस फैसले को शिक्षकों के खिलाफ सामंती करार देते हुए घोर निंदा किया है। साथ ही मशवरा दिया है कि सरकार अपने फैसले की समीक्षा करें।

न्यूज़ बिहार ने इस मुद्दे पर पूर्व शिक्षामंत्री डॉ अशोक चौधरी की राय जाननी चाही पर उनसे संपर्क नही हो सका। इस विषय पर पूर्वमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ मदन मोहन झा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। डॉ झा ने कहा कि दो दशक से नीतीश जी मुख्यमंत्री हैं। दो साल से भी कम वक्त में जिस तरह का सुधार शिक्षा के क्षेत्र में या अन्य किसी भी क्षेत्र में कांग्रेस के मंत्रियों ने किया है वो मिल का पत्थर है। कदाचार मुक्त परीक्षा, पारदर्शी शिक्षा एवं शिक्षकों के साथ बच्चों का तालमेल इन 20 महीनों में बैठाया गया वो हमेशा याद रखा जाएगा। केंद्र के असहयोग की जानकारी खुद मुख्यमंत्री को थी जिसकी लड़ाई लड़ी जा रही थी।

डॉ झा ने कहा कि अपनी कमियों को छुपाने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का शिक्षकों को जबरन रिटायर करने का फरमान जारी करना अनैतिक है। बिहार की गद्दी विराजमान नीतीश जी को सबसे पहले अपनी समीक्षा करनी चाहिए। शिक्षा में कड़ाई, कदाचार पर लगाम लगाने से अगर रिजल्ट पर असर आया तो यह वर्षों से चली आ रही कदाचार समाप्त करने के रूप में देखा जाना चाहिए।

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