बिहार :बिहार में जदयू और भाजपा गठबंधन की सरकार है ।असली परीक्षा अररिया लोकसभा सीट पर होनी है ।इस सीट पर दोनों की दावेदारी बराबर की है।इसलिए देखना होगा कि यह सीट किसके खाते में जाती है। पिछले वर्ष 17 सितंबर को भारतीय राजनीतिज्ञ के नामवर शख्सियत अररिया सांसद तस्लीमउद्दीन के निधन होने से खाली हुई इस सीट पर सबकी निगाहें टिकी है।2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार प्रदीप कुमार सिंह दुसरे स्थान पर रहे थे ।और उनको दो लाख 61 हजार वोट मिला था।जबकि जदयू उम्मीदवार विजय कुमार मंडल को दो लाख 21 हजार वोट हासिल हुई थी।तस्लीमउद्दीन को चार लाख सात हजार वोट मिले थे ।इसलिए भाजपा की अधिक दावेदारी हो रही है।जबकि 4 जनवरी को सिमांचल गांधी तस्लीमउद्दीन के जयंती समारोह में जदयू मंत्री श्रवण कुमार, विधान पार्षद गुलाम रसूल बलियावी आदि बड़े नेता चुनावी बिगुल फूंक चुके हैं।दोनो ही पार्टियां दावेदारी पेश कर रही है।अधिक दावेदारी भाजपा पेश कर रही है।क्योंकि पिछले चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार दुसरे स्थान पर रहे थे।भाजपा नेताओं का कहना है कि उनके उम्मीदवार के नाम धुव्रीकरण होगा और जीत की संभावना अधिक है।चर्चा यह भी चल रही है कि इस सीट से भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहनवाज हुसैन चुनाव लड़ेंगे ।दुसरी तरफ जदयू का दावा इस आधार पर है कि दिवंगत सांसद तस्लीमउद्दीन के बेटे सरफराज आलम जदयू के विधायक हैं।सरफराज आलम चार बार जोकिहाट विधानसभा से विधायक चुने गए हैं ।और एक बार मंत्री का बनने का स्वभाग्य प्राप्त हुआ।जदयू का दावा इस आधार पर भी है कि पिछली बार भाजपा चुनाव हार गई थी,इसलिए यह सीट भाजपा छोड़ सकती है।खैर जो हो भाजपा और जदयू की पहली परीक्षा टिकट तय करने की है,उसके बाद चुनाव जीतने की ।लोगों का कहना है लालू प्रसाद यादव के जेल जाने से यादव और मुस्लिमों में उनके प्रति हमदर्दी बढ़ी है।सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार सरफराज आलम राजद से चुनाव लड़ेंगे ।बहरहाल देखना दिलचस्प होगा कि जदयू -भाजपा से टिकट किसको मिलता है ।और राजद-कांग्रेस से कौन उम्मीदवार होंगे ।

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