अभी अभी प्राप्त सूचना के अनुसार राज्यसभा सचिवालय द्वारा माननीय शरद यादव और अली अनवर की राज्यसभा सदस्यता समाप्त करने का फर्मान जारी किया। छः पन्नों के आदेश में राज्य सभा के द्वारा नियमों का हवाला देते हुए दोनों की सदस्यता समाप्त कर दी गई है।

जदयू के प्रवक्ता एमएलसी नीरज कुमार ने बताया कि शरद यादव और अली अनवर जो जद(यू) के नामित सांसद थे उनके द्वारा संविधान के दसवीं अनुसूची का उल्लंघन करने का दोषी करार देते हुए पार्टी ने सदस्यता समाय करने का आवेदन दिया था। ये दोनों सदस्य जदयू के खिलाफ जो ग़ैरसंवैधानिक था पार्टी के विरुद्ध आचरण कर रहे थे। दोनों लालु प्रसाद के भ्रष्टाचारी राजनैतिक संस्कृति और वंशवाद के लिए जिंदाबाद का नारा लगाने लगे थे।


नीरज कुमार ने कहा इनके इस पार्टी विरुद्ध जाने और दल के संविधान के खिलाफ आचरण को देखते हुए। तब स्वाभाविक रूप से जद(यू) ने आवेदन दिया और उस पर राज्यसभा सचिवालय ने इनकी सदस्यता समाप्त करने का निर्णय लिया, हमारी पार्टी इसका स्वागत करती है। नीरज कुमार कहते हैं कि जनता दल(यू) इस रूप में स्वागत करता है कि शरद यादव और अली अनवर ने जो राजनीति की शुचिता भंग की थी। संविधान के दसवीं अनुसूची और दल-बदल कानून की रक्षा हुई। और राजनीति में जो लंपट संस्कृति लालु प्रसाद और उनके कुनबे का है, उसे करारा जवाब मिला है।


नीरज कुमार कहते हैं कि शरद यादव जी लालु यादव जिंदाबाद से काम नहीं चलेगा। अब तो आप तेजस्वी, तेजप्रताप, मीसा भारती, राबडी देवी के जिंदाबाद का नारा लगाईए। उन लोगों का साथ जिनके लिए राजनीति धनार्जन का माध्यम है, इसे सिद्धांत के रूप में अपने जीवन में प्रतिपादित कीजिए। शरदजी अब तो आप आज़ाद हैं और आपके पास अब रास्ता भी तो एकमात्र यही बचा है।
राज्यसभा के इस फैसले से जदयू में खुशी है। युवा जदयू के प्रवक्ता ओम प्रकाश सिंह सेतु ने इस फैसले पर प्रसन्नता जाहर करते हुए कहा है कि ये तो होना ही था। जदयू आंतरिक रूप से भी पूरी तरह से लोकतांत्रिक दल है। किसी को भी पार्टी के संविधान जाने, खिलाफत करने और अहित करने का अधिकार नही है। शरद यादव और अली अनवर के द्वारा दल विरुद्ध आचरण करने पर सदस्यता समाप्ति का जो आवेदन दिया गया था। उसे स्वीकार करते हुए सदस्यता समाप्ति का आदेश स्वागत योग्य है। सच्चाई की जीत हुई है यह नीतीश कुमार जी के प्रति जदयू के एकजुटता का प्रमाण है।

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