पटना, अपना चौपाल पाटलिपुत्र के लिए ऐतिहासिक दिन रहा। पहली बार आधी आबादी को मेयर के रूप में प्रथम नागरिक के रूप में प्रतिनिधित्व का अवसर मिला। इस बार महिलाओं के लिए 50% निगम में आरक्षण दी गई थी। वार्ड पार्षद के रूप में जितने वाली सीता साहू पहली महिला मेयर बनी। महिलाओं में इस बात की काफी खुशी है।


एक तरफ रजनी देवी और दूसरी तरफ सीता साहू मेयर पद की दो बड़ी दावेदार मैदान में थीं। लेकिन जीत का सेहरा सीता साहू के सिर सजा जो एनडीए समर्थित पत्यासी थी। मेयर चुनाव में महागठबंधन समर्थित रजनी देवी का पराजय को बड़ी हार के रूप में देखा जा रहा है। एनडीए ने इस पर अपना कब्जा जमाया।

पटना नगर निगम के वार्ड नंबर 58 की पार्षद रही सीता साहू पटना की मेयर चुनी गई हैं। वोटिंग में 75 में दो मत अवैध पाए गए। इस वोटिंग में रजनी देवी के 35 वोट के खिलाफ 38 वोट पा कर सीता साहु को विजयश्री की प्राप्ति हुई।

वोटिंग से पूर्व दोनों उम्मीदवारों का दावा था कि 50 से 60 पार्षद उनके पक्ष में हैं। परंतु 75 पार्षदों की संख्या वाले पटना नगर निगम के पार्षदों ने सीता साहू पर अपना भरोसा जताया। दोनों ही गुटों में मेयर पड़ के चयन के बाद उम्मीदवार के प्रति असंतुष्टि बढ़ी है।
भाजपा की सक्रियता और फील्डिंग मेयर के खेल में बढ़िया रही। जिसने महागंठबंधन टीम को सस्ते में आऊट कर दिया।

महापौर एवं उप महापौर पदों के लिए सोमवार को हुए चुनाव में दोनों ही पद पर राजग के भाजपा समर्थित प्रत्याशियों की जीत हुई है। सीता साहू पटना की प्रथम महिला महापौर बनी है। वहीं विनय कुमार पप्पू उप महापौर निर्वाचित हुए है। 75 पार्षदों वाले पटना नगर निगम के महापौर के चुनाव में महागठबंधन की समर्थित रजनी देवी के बीच टक्कर तो कांटे की रही परंतु हार से महागठबंधन के एकजुट होने पर सवाल भी खड़े होने लगे हैं। महापौर के बाद उप महापौर के रूप में विनय कुमार पप्पू का चुनां जाना शक को और भी पुख्ता करता है। उप महापौर चुनाव में राजग स​मर्थित विनय कुमार पप्पू को 52 और महागठबंधन समर्थित आशीष कुमार को​ मात्र 23 पार्षदों का समर्थन मिलना कुछ तो बात है इसका इशारा करता है।

बिहार में इस वर्ष कुल 110 शहरी निकायों के आम चुनाव एवं छह नगर निगमों के चुनाव हुए है। हालांकि चुनाव दलीय आधार पर नहीं होने के बावजूद शहरी निकायों के अध्यक्षों के चुनाव में विभिन्न दलों के नेताओं ने अपने सगे संबधियों व समर्थकों को जीताने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। सूत्र बताते हैं हर तरह की जोर आजमाईश, धनबल के खेल होने की बात चर्चा में है। भागलपुर, मुजपफरपुर के नगर निगमों पड़ पर भी महापौर के पदों पर भाजपा स​मर्थित उम्मीदवार को जीत मिली है।

पटना नगर निगम के बाद शेष बचे मुंगेर नगर निगम के महापौर का चुनाव 27 जून को है। बिहारशरीफ, आरा और गया नगर निगमों के महापौर के पद पर सत्तारुढ़ महागठबंधन द्वारा स​मर्थित उम्मीदवार आसीन हुए हैं। वही भाजपा सूत्रों का कहना है कि सबसे प्रतिष्ठित राजधानी के पटना नगर निगम की दोनों ही सीट मेयर और उपमेयर पर महागठबंधन की हार से यह साबित होता है कि महागठबंधन के अंदर कुछ भी ठीक नही है। यह स्वार्थ का गठबंधन जिस की मियाद पूरी हो चुकी है। जल्दी ही बिहार से इसका सफाया हो जाएगा।

न्यूज़ बिहार पटना नगर निगम के महापौर एवं उपमहापौर सहित राज्य भर के विजयी परिषद के अध्यक्ष, मेयर, उपमेयर और सभी पार्षदों को शुभकामनाएं देता है।