पटना (राजन कुमार सिंह) :- स्थानीय कालिदास रंगालय में निर्माण कला मंच के 29 वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव ” तथागत नाटक समारोह ”  के दूसरे दिन हम थिएटर ग्रुप,भोपाल मध्यप्रदेश द्वारा बालेंद्र सिंह लिखित एवं निर्देशित नाटक ‘ उदभ्रांत ‘ की प्रस्तुति हुई।

 कहानी बुद्ध के जातक कथाओं पर आधारित है। किसी समय किसी जंगल में एक सूअर वनराज ‘सिंह’ को स्वयं खाने के लिए ललकारता है, किंतु सिंह राजा उसकी बेतुक ललकार को नजरअंदाज कर उसे अगले हफ्ते खाने की बात कहता है । राजा के इस इंकार से सूअर को यह वहम हो जाता है कि वनराज उससे डरता है। गीदड़ भी उसके भ्रम को बल देता है। दूसरे वनीय जंतु उसे समझाने की व्यर्थ चेष्टा करते हैं,पर गीदड़ के उकसावे से उदभ्रांत सूअर शेर का ध्यान आकृष्ट करने के लिए नए-नए भौंडे तरीके अपनाता है जिससे बाकी जंतु घबराकर शेर की शरण में आकर अपनी प्राणरक्षा करते हैं । प्रकृति की शाश्वत सत्ता में स्वयं को समर्पित कर प्रकृति के चक्र का अंग बनते हैं । नाटक में जानवरों को मुखौटे , दैहिक क्रिया एवं हाव-भाव से दिखाने का अच्छा प्रयास किया गया है। रिकॉर्डेड आवाज़ के इस्तेमाल से अभिनेता कठपुतली समान प्रतीत हो रहे थे। 

आधुनिक तकनीक का नाटक में अच्छा प्रयोग किया गया है। कुल मिलाकर नाटक दर्शकों का मनोरंजन करने में कामयाब रहा। मंच पर भाग लेने वाले कलाकारों में मुकेश सूर्यवंशी,कुसुम शास्त्री, सोनू साहा, अनिल संसारे, एकता, श्रेया सिंह,नागेंद्र सिंह, पवन प्रजापति, आदित्य तिवारी,विभव, भारत सिंह, रमेश अहीरे,भरत जेठवानी, अंकित कुमार, विश्वजीत सिंह ,यामिनी चक्रवाणी ,सावित्री, स्वर्णिमा सिंह,सपना अग्रवाल,मुकेश पाचौड़ी, लक्ष्मीनारायण ओसले,अदा अग्रवाल, स्वर्णिमा सिंह थे। मंच परे कलाकारों में वेशभूषा- सोनू साहा / राकेश नामदेव ,मुखौटा-गयूर कुरैशी, रूप सज्जा-सीमा मोरे ,ग्राफिक्स-आशीष श्रीवास्तव,सहायक नृत्य संयोजक-अनिल संसारे, संगीत संयोजन एवं तकनीकी निर्देशन- मॉरिस लाजरस ,नृत्य संयोजन- चंद्र माधव बारिक। कार्यक्रम का मंच संचालन अभिषेक शर्मा में किया। नाट्योत्सव के प्रथम सत्र में नाद,पटना द्वारा विवेक कुमार लिखित नुक्कड़ नाटक ‘ जनतागिरी ‘ का मंचन मो जानी के निर्देशन में हुआ। भाग लेने वाले कलाकारों में मो आसिफ, अभिषेक चौहान ,उज्वल कुमार, बिनीता सिंह, राजीव राय ,सौरव सफारी, अजय कुमार एवं रवि कश्यप थे।