विजय बाबा "मिश्रा"

विजय मिश्र बाबा
पटना , बिहार
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार आ सामाजिक कार्यकर्ता बानी  )

मई 18, 2017 

हमारा वतनपरस्ती के  काहे अनेरे  तू तौलत बाड़ ..

दुख में हम बानी आ तू कहतार की तू झेलत बाड़ ..

इ दुई गो पंक्ति के लिखे में हमारा मात्र चन्द सेकेण्ड लागल, काहे से कि करेजा के बात जाबान प आवे में इचिको देरी काहांवा लागेला। मय भारत भरी में इहे हाली कुल्हिये लोग के बाटे।

एगो हिन्दी में बड़ी लल्लन टॉप के गाना बाटे “भरोसा कर लिया जिस पर उसी ने हमको लूटा है।” ई ओह घरी के बात ह जब लूट खसोट काम होत रहे। बाकी ई बात बेल्कुल साफ़ बाटे की मन जवन सोचेला उ त बड़ कमाल के सोचेला। खैर हमारा ई कुल्हि अंटसंट बात से लेना देना का बाटे। चाहे  महंगाई ई महंगाई बढ़ी के गांगा जी सुखाईल घाट लेखा लमहर मैदान हो जाऊ। हेने जईसे बढ़ी होने तानिकी भ स्क्रू टाईट कइला के बा। झट देनी किराया बढ़ा के महंगाई  डईनी के मत्थे ओढ़ा देवे के बा। फेरु कईसन महंगाई कहाँ के महंगाई !! जाऊ जाताना ऊंचाई प ले जाए के बा ऐकरा। हम त ना मुन्ना मियां हईं न भुवन जे ई महंगाई बढ़ते हाई तौबा मचाइबि। अरे भाई उहे मुन्ना मियां जवन मोटर गाडी के डेंटिंग करे ले अउरी  भुवना  हमार दू थरिया ओडावन ले के चाभे वाला ड्राइवर।

ऐकनी दुनों से हमारा रोजे पाला पड़ेला, सांझी होते  बैठका प मजलिस लगा दीहें स। जाहां कवनो चिझु के दाम बढाला के हाला भईल की सबसे बेसी ऐहि दुनों के बिपत परेला। एक बात त बा कि आजु के जुग में  गंगा जमुना देखे के बा त भुवन अउरी मुन्ना मियां के देखीं। हां त बात महंगाई के होत रहल हा दुनों जोटिया के शुरू हो जईंहें स ऐ मालिक ई त घोर कलियुग आ गईल बा। आलूईयो आसमान छू देहलस तरकारी तीयना त जईसे अब बूझि की देखनहरु हो गईल। यहां से पूरा बाल बच्चा मेहरारू से ले के मय काथा कहानी शुरू।

अब बगल में ढेर देरी से मुँह में जाब लगवले बईठल अरुण बाबू बात उगिले खातिर तेयार बाड़े। कबे से ई कुल्हि सुनी के उनुका बतरस के हुली आवत रहे। शुरू भईले का बाबा रऊओ ई कुल्हि कबाड़ी के काहे बिटोरी के राखेनी। ऐकनी के चाहला भा ना चाहला से का होई। अरे मुन्ना भाई अपन देश ऐह दुनिया के सबसे बड़हन लोकतंत्र हटूए अउरी लोकतंत्र में जवन दुःख होई उ लोगे के झेलना बा। काहे की लोक-तंत्र में लोग पाहिले बा। तंत्र खातिर जेकरा के चुनी के भेजल जाला ओकरो त खाराचा खोराकी हमनिये के माथे बा। महंगाई बढ़ो भा घटो ओहनी के ऐह से का लेना देना बाटे। उनुका कवन कमाये धमाये के चिंता फिकिर बा। ओह लो ख़ातिर त गदहा अउरी बैल के लेखा हाड़ तुरि के हमनी के कमाइये रहल बानी जा। आपाना घरे भले लेहाना जनि लागो बाकिर उनुका किंहा छप्पन प्रकार तराये के चाहीं।

अरुण भाई अब पूरा लिखी धई लेले, हां भुवन भाई  अलबत्ता त ई बात बा कि राजनितिक लोग जवना बात के नाव प जित के जाले ऊ त गिरह परी ल की जिअत जिनिगी कबो ना करीहें।  काहे कि जब कईये दीहें त के पूछी, हमनी के भोजपुरी में ऊ कहाला नु ” ऐ छूँछा तोह के के पूछा” । बस पाँच बारिस तक ले लोग के उरुआ बनवले रहेले। अतने ना जनता के त आन्हर अउरी चोन्हर बुझे ले ई नेता कुल्हि।                                             

आजादी खातिर जवन महापुरुष शहीद हो गईल ऊ आजु के ई सब हाल देख देख के लोर त ढरकावते नु होइहें। माने आजु जवन हाल जनता के बाटे ओह प इहे नु कहाई “देख ताहारा हिंदुस्तान के हालत का कई देहले स ई बनी के प्रधान कुछुओ ना बदलल भारत के  दिनमान”। सांचो आजु के सियासी कुल्हि गांधी, नेहरू, पटेल, भगत सिंह राजगुरु, सुखदेव, अशफाकुल्लाह खां, सुभाष चंद्र बोस लेखा मय महापुरुष के अपना फाएदा खातिर बाखारा निअर बांटी के आपुसे में लाडावत भिडावत बाड़े स। देश के लोग के अलग अलग डंडारी पारी के डेरवावत रहे ले स की इहे तहनी के लक्ष्मण रेखा ह पार जनि करिह। आ आपन उल्लू सीधा करत बाड़े स। इहे ना सत्ता खातिर कवनो हद तक जाये में ऐहनी के कवनों गुरेज परहेज नईखे। असहूँ  बेसी लोगों के आपने पेट भरे से मतलब बाटे। भूखी के भूगोल ना अब ले लिखाईल ना कतहूँ पढ़ाई भईल बाटे। भूख अउरी बेकारी ई लाचारी ना शासन के दुराचार ह कहीं त ई अईसन एमएमएस MMS ह जवना के देखि देखि के सत्ता अउरी शासक मने मने मुस्कात रहेले।

ग़ालिब से ले के गरीब तक के एक भाखा बा …

#ग़ालिब

“दिल को बहलाने के लिए ग़ालिब ये ख़याल अच्छा है।”

#बाबावाणी

“सियासत करे खातिर भूख भीख भाखा ई सवाल अच्छा बा।”

विजय मिश्र बाबा

पटना , बिहार

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार आ सामाजिक कार्यकर्ता बानी  )

Subscribe us on whatsapp