युवा राजद ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि लोकतंत्र और लोकशाही मर्यादित बोल से चलते हैं न कि अमर्यादित बोल से। नीतीश कुमार जी के इशारे पर जिस तरह से जदयू के प्रवक्ताओं द्वारा राजद प्रमुख लालू प्रसाद के उपर अमर्यादित तरीके से बयानबाजी कर राजनीतिक मर्यादा को तार-तार किया जा रहा है वह स्वस्थ लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।


युवा राजद के प्रवक्ता ने कहा कि सृजन घोटाला से लेकर एलईडी बल्ब घोटाला, शौचालय घोटाला, धान घोटाला, बांध घोटाला सहित कई दर्जन घोटाला के आरोपों से घिरे नीतीश कुमार और जदयू के लोग अब ये छटपटाहट में कुछ भी बोले जा रहे हैं। इस तरह की भाषा पहले भाजपा-आरएसएस के लोग अमर्यादित भाषा बोलते थे। उन लोगों ने तो पीएचडी किया है, अब जब से जदयू भाजपा के परछाईं में गयी है तब से ऐसा लगता है कि इतने कम समय मे जदयू के लोग भी अमर्यादित भाषा में पीएचडी कर लिए हैं।


युवा राजद के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी अरुण यादव ने कहा कि जदयू के प्रवक्ताओं को राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद की चिंता छोड़ अपने आका नीतीश कुमार जी का चिंता करनी चाहिए। 2020 में बिहार की सत्ता से बेदखल होने के बाद कुर्सी के तन्हाई में कैसे गुजारेंगे दिन। राजद प्रमुख लालू प्रसाद के तरह नीतीश जी जनाधार वाले नेता भी नहीं है कि सत्ता के बगैर भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा। जदयू और भाजपा नेताओं को बिहार के विकास की चिंता नहीं है। प्रदेश में हत्या, लूट, बलात्कार, अपहरण, रंगदारी जैसी अपराधिक घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है। लोग अपराधियों के खौफ से डरे और सहमे हुए हैं।

युवा राजद के प्रवक्ता अरुण ने कहा कि नीतीश कुमार की सरकार हर मोर्चे पर पूरी तरह विफल साबित हो चुकी है। आने वाले 2019 के लोकसभा चुनाव और 2020 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और जदयू के अनैतिक गठबंधन को प्रदेश की जनता अच्छी तरह से सबक सिखायेगी। भाजपा का पिछलग्गू बन जदयू में रहा सहा संस्कार भी खत्म, 2019 में हाफ और 2020 में जदयू साफ।

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