न्यूज़ बिहार डेस्क, प्रारब्ध : पितृपक्ष में पितरों के तृप्ति की चर्चा के साथ साथ यह भी आवश्यक है कि हम अपने माता पिता, दादा दादी या अन्य बुजुर्ग के जीवित अवस्था मे सम्यक् प्रकारेण सेवा सुश्रुषा कैसे और कितना श्रद्धा से करते हैं यह महत्वपूर्ण है। श्रेष्ठजनों का मत है कि देव भाव से प्रतिदिन पुत्र द्वारा सेवा प्राप्त होने से ऐसा पुत्र पाना या जन्म देना सफल जीवन का अंश है। ऐसे माता पिता पुत्र के साथ ही पुरुषार्थ से भी उत्कृष्ट तत्व को प्राप्त कर लेते हैं।

कहा गया है कि जीवित अवस्था में यदि माता पिता का अनादर किया जाए और मरणोपरांत पिण्डदान करें तो ऐसे पिण्ड को प्रसन्न मन से पितृगण नही स्वीकारते। पिता तो प्रजापति होते हैं माता साक्षात धरा की मूर्ति होती हैं अतः इनको कभी मनसा वाचा कर्मणा से अनादर या अपमान नही करना चाहिए।

माता साक्षात् धरा मूर्ति, पिता मूर्ति प्रजापतिः।।

कहा गया है कि अपने सुकर्मों से कदाचित् देव ऋण से मुक्त हो सकते हैं, कर्तव्य से कदाचित् ऋषि ऋण से भी मुक्त हो सकते हैं, श्रम एवं साध्य से कदाचित् सभी ऋणों से मुक्ति हो सकते है लेकिन मातृ ऋण पितृ ऋण से मुक्त होना असंभव है। अतः जीवित अवस्था में ही माता पिता को श्रद्धापूर्ण सेवा विधि से प्रसन्न करके ऋण मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है। सेवा से खुश होकर माता पिता को इन तरह का आशीर्वाद देने के लिए विवश हो जाना पड़े, सेवा इस तरह से निस्वार्थ भाव से करना चाहिए।

पितृपक्ष में आप पाठकों तक यह सार्थक विषय लाना आवश्यक लगा। क्योंकि पितरों के प्रति अपने कर्तव्य और श्रद्धा के साथ बुजुर्गों से सरोकार, उनका आदर, सत्कार सेवा और देख भाल अत्यंत ही जरूरी है। शास्त्रों में कहा गया है …

सर्वार्थसंभवो देहो जनित: पोषितो यत: ।
न तयोर्याति निर्वेशं पित्रोर्मत्र्य: शतायुषा ॥

अर्थात, माता पिता के ऋण से सौ वर्ष की आयु प्राप्त करके भी उऋण नही हुआ जा सकता। वास्तव में जो शरीर धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति का प्रमुख साधन होता है, उसका निर्माण तथा पालन-पोषण जिनके द्वारा हुआ है, उनके ऋण से मुक्त होना कठिन ही नही, सर्वथा असम्भव है।

पितृपक्ष के विषय मे जानकारी और चर्चा के दरम्यान पुरोहित न्यास के पुरोहितों को ऐसा लगता है कि पितृपक्ष के महत्व और इस विषय पर चर्चा के साथ साथ बुजुर्गों के प्रति कर्तव्य और सेवा पर भी विमर्श जरूरी है। इस सार्थक विषय को आम चर्चा एवं जानकारी हेतु सार्वजनिक मंच पर रखने के लिए न्यूज़ बिहार को साधुवाद। पुरोहित चेरिटेबल ट्रस्ट, के सभी सदस्यों, पुरोहित धर्म, धरोहर, वेद, पुराण, ग्रन्थ, गौ, गंगा, गौरी और गायत्री की रक्षण संरक्षण और संवर्धन के आरती समर्पित न्यास है। जो लगातार समाज मे फैलाई जा रही दुर्भावना, विषमता दूर कर तथ्यों को उसके मूल रूप में प्रस्तुत कर एकता प्रेम भाईचारा को कायम कर सही और समुचित रुप में रखने के प्रति पूर्ण संकल्पित है।

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पुरोहित चेरिटेबल ट्रस्ट
पुरोहित अजीत तिवारी वैदिक