न्यूज़ बिहार डेस्क, गोपालगंज : बिहार में आई बाढ़ से हुई तबाही और उस पर आये बयानों पर जनप्रतिनिधि मुखर होने लगे हैं। बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष व बैकुंठपुर के युवा विधायक मिथिलेश तिवारी ने कहा कि बिहार में बांध टूटने के लिए अधिकारियों पर जवाबदेही तय हो, चूहों पर नहीं। उक्त बातें गुरुवार को प्रेस को गोपालगंजमें संबोधित करते हुए कही।

न्यूज़ बिहार से बाढ़ आने के प्रारंभ से जी लगातार तिवारी जी से बात होती रही है। बाढ़ राहत और बचाव के प्रति उनके द्वारा किये गए कार्यों को न्यूज़ बिहार साझा करता रहा है। इसके साथ ही विधान सभा से लेकर सरकार और संबंधित विभाग को इस विषय पर तिवारी लगातार चिंता जताते रहे हैं। तिवारी के कहा कि 15 अगस्त को सारण बांध और रिंग बांध बैकुंठपुर में टूटा था। इसको लेकर उन्होंने विभाग और सरकार से बांध पक्का करने का अनुरोध किया। तब सदन में कहा गया कि बांध मजबूत है और इसके पक्कीकरण करने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन गोपालगंज के बैकुंठपुर में बांध कई जगह टूट गया। जिसके बाद जलसंसाधन मंत्री ललन सिंह का बयान आया कि चूहों के कारण बांध कमजोर हुआ और टूट गया, इस बयान पर हंसी आती है।

तिवारी ने कहा कि किसी पदाधिकारी के कारण सरकार के मंत्री का इस तरह का बयान समझ से परे है। इस तरह के गलत रिपोर्ट से लोगों में सरकार का इकबाल काम होता है व भरोसा पर भी बट्टा लगता है। रिपोर्ट के मुताबिक यदि बांध सुरक्षित और मजबूत था तो टूट कैसे गया। तिवारी ने कहा कि इस तरह की गैरजिम्मेदाराना बयान और रिपोर्ट जिससे कि जान माल सीधे तौर पर प्रभावित होता है। उस पर अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। चूहों की बैशाखी पर इतनी बड़ी घटना को रफा दफा करना वो भी मेरी चिंता जताने के मात्र कुछ ही दिन बाद अफशोस जनक है। मिथिलेश तिवारी ने कहा कि मेरे क्षेत्र की जनता हो या समूचे प्रदेश की इस तरह किसी किसी भी अधिकारी या अन्य के लापरवाही और गैरजिम्मेदाराना कर्तव्य के कारण काल के गाल में जाये यह बर्दाश्त नही किया जा सकता है। उन्होंने कहा इस घटना को लेकर वो मुख्यमंत्री से मिलेंगे और मामले से संबंधित जो भी उच्च अधिकारी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई हो।

मिथिलेश तिवारी इस घटना से काफी आहत दिखे उन्होंने आगे कहा कि अगर दोषियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तो वे अपने ही सरकार के खिलाफ सड़क पर बैठेंगे और आन्दोलन करेंगे। क्योंकि जिले में 20 लोगों की मौत के लिए जल संसाधन विभाग के अधिकारी दोषी हैं, चूहे नहीं। कभी शराब बंदी में पकड़े गए शराब चूहों के पी जाने की रिपोर्ट बनाते हैं तो कभी लोगों के तटबंध टूटने का आरोप चूहे पर लगाते हैं। अधिकारियों के कर्तव्यहीनता और इस तरह के उलजुलूल मनगढंत बयान सरकार के ऊपर से लोगों का भरोसा खत्म कर देंगे। वक्त रहते ऐसे लोगों पर उचित कार्रवाई होना चाहिए।