कई बार अभिभावक स्वंय इस बात को लेकर असमंजस में रहते हैं, कि सही सेक्स शिक्षा किस आधार पर बच्चों को दी जाएं? सेक्स के प्रति सही जानकारी व जागरूकता ही सही सेक्स एजुकेशन का सिद्धांत है, और ये आप तभी अपने बच्चों को दे सकते है, जब आपको खुद इसकी सही जानकारी हो! केवल सेक्स को एक प्लेजर या काम की क्रिया के रूप में जान लेना सही नहीं है। सेक्स एजुकेशन का मतलब है कि हम अपने बच्चों को पूरी सही जानकारी के साथ सेक्स की शिक्षा दें।
आज जहां बच्चों में सेक्स को लेकर एक नई तरह की उत्सुकता व भ्रम है वही कई गंभीर अपराधों की जड़ है। 2012 के निर्भया कांड में एक किशोर बच्चे का सबसे खौफनाक रूप देखने को मिला था। जिसने सेक्स की उत्सुकता और पूरी जानकारी न होने के अभाव में ही इतना बड़ा कुकर्म किया था। तो ये बेहद जरूरी है कि अपने बच्चों को सही उम्र में सेक्स शिक्षा दी जाएं जिससे वे अपनी उम्र में कोई गलत काम को अंजाम न दे सकें और आज हमारा समाज भी इसके प्रति बेहद गंभीर हो रहा है और आज ये एक चिंता का विषय बना हुआ है।

सेक्स एजुकेशन का ज्ञान होना उतना ही जरूरी है, जितना कि अन्य विषयों का ज्ञान होना। सेक्स एजुकेशन न केवल आपके समय ज्ञान को बढ़ाती है बल्कि ये आपकी मानसिक समझ का भी विकास करती है। हमारे देश में सेक्स एजुकेशन का विषय हर स्कूल में लागू कर दिया है मगर फिर भी स्कूलों में सेक्स एजुकेशन का ज्ञान नहीं दिया जा रहा, जिसकी वजह से बच्चों में सेक्स के प्रति अंधविश्वास बड़ रहा है और इससे जुड़ी कई समस्याएं पैदा हो रही हैं।

टीन मदरहुड में कमी आएगी
अगर सही उम्र में बच्चों को सेक्स का ज्ञान दिया जाएगा तो किशोरावस्था में जो लड़कियां मां बनती हैं, उसमें कमी आने लग जाएगी। एक स्टडी से पता चला है कि सही शिक्षा के अभाव में टीन मदरहुड जैसी समस्या समाज में ज्यादा देखने को मिल रही हैं।
अनचाहे गर्भ की समस्या
हमारे देश में किशोरावस्था में अनचाहे गर्भ की समस्या अधिक होने लगी है। एक सर्वे के हिसाब से अधिकत्तर किशोरी आजकल ज्यादा आती हैं गर्भपात कराने, जिसमें उन्हें अन्य गंभीर समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। ये सिर्फ सही सेक्स शिक्षा के अभाव के दुष्परिणाम हैं।
यौन अपराध की समस्या
जैसा कि मैं पहले बता चुकी हूं कि सेक्स की सही जानकारी न होने व सेक्स के प्रति अधिक जिज्ञासा और बुरी संगत के चलते कई किशोर व किशोरियां आज यौन अपराध करने में नहीं हिचकते हैं आपको शायद पता हो अभी हाल में ही केवल दिल्ली शहर में ही ऐसे कई यौन अपराधों के मामले सामने आएं हैं, जिनमें अपराध करने वाले किशोर थे और दूसरे बच्चे के साथ वे ये अपराध कर रहे थे। इसलिए सही समय पर सेक्स शिक्षा का मिलना आज बेहद जरूरी हो गया है।
गुप्तरोग व एड्स की रोकथाम
सेक्स एजुकेशन में एक बेहद गंभीर विषय है कि बढ़ती उम्र में बच्चों में गुप्तरोग व एड्स जैसी लाइलाज बीमारी के प्रति जागरूकता को बढ़ाया जाए, जिससे हमारे टीन्स को पता चले कि यदि आप सेक्स की लालसा में किसी गलत इंसान से संपर्क बनाते हैं तो सीधे तौर पर आप इन बीमारियों को न्यौता देना का काम कर रहे हैं, जिससे आपके साथ आपके परिवार को भी इस समस्या का हिस्सा बनना पड़ेगा। इसलिए अपनी सही उम्र में अपने जीवन को सही दिशा में लेकर जाएं।
♦यौन शिक्षा की सही उम्र
आज के बदलते दौर को देखते हुए हमने नोटिस किया है कि बच्चों में सेक्स के प्रति बहुत जिज्ञासा होती है । जिसके चलते आज बच्चों को 13 से 14 साल की उम्र में सेक्स एजुकेशन देना शुरू कर देना चाहिए ताकि वह सही समय पर इसे ग्रहण कर अपने को सही से संभाल पाएं। क्योंकि सही यौन शिक्षा मिलने से लड़के व लड़कियों के मन में किसी तरह की उलझन नहीं होती है और मन में किसी प्रकार की नकारात्मक सोच नहीं बनती। वे समझने लगते हैं कि पहले हमें एक जिम्मेदार नागरिक बनना है और अपने करियर को सही दिशा देनी है ।

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