स्मार्ट सिटी बनने जा रहे पटना में एक ऐसा भी सड़क है जहाँ किसी बाइक या साइकिल सवार की बस थोड़ी सी असावधानी उसकी जान ले सकती है या उस अवस्था में पहुँचा सकती है। बहुत सावधानी बरतकर भी वो इससे बच जायेंगे ये पूरी गारंटी के साथ संभव नहीं है। पटना के राजेंद्रनगर पुल पर से गुजरते हुए हर समय आप किसी साइको किलर या सोची समझी साज़िश कर गला रेतने वाले गैंग की नज़र में होते हैं। आपको एक घटना सुनकर इस बात पर उतना यकीन भले न हो लेकिन जब आप महीने में तीन सुनेंगे तब तो करेंगे।

राजेंद्रनगर पुल पर से गुजरते हुए पतंग के मांझा से गला रेतने का प्रयास किया जा रहा है। मांझा मतलब कि बहुत तेज धार वाले धागे जिसमें अच्छी मात्रा में कांच का अंश होता है। दो दिनों पहले पटना विश्वविद्यालय के छात्र अविनाश कुमार अपनी बाइक से गांधी मैदान जा रहे थे। वैशाली गोलंबर की ओर पुल के ढलान पर उन्हें अहसास हुआ कि उनके छाती के आसपास कुछ हल्का से उन्हें खींचने की कोशिश कर रहा है। तब उन्होंने धागे को हाथ से हटाने कोशिश कि जिसमें उनका हाथ पूरी तरह जख्मी हो गया और इसी से आगे गर्दन भी कट गई। इसके बाद वो ऐसी स्थिति में नहीं थे कि कुछ भी समझ पायें कि कैसे हुआ। वो हिम्मत करके किसी तरह अस्पताल पहुँचे। धागे की धार का अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते हैं कि डॉक्टर ने बताया कि वह गले की नस और श्वासनली से बस एक सेंटीमीटर ही दूर रह गया। अस्पताल में यह भी पता चला कि उस पुल पर महीने की यह तीसरी घटना थी। इसी तरह कुछ दिनों पहले एक और शख्स के साथ भी यही हुआ जिसमें उसकी जान चली गई। जब एक पर एक तीन ऐसी घटना हो जाती है तो इसे इतनी आसानी से अनदेखा नहीं किया जा सकता। यह संयोग तो बिल्कुल भी नहीं हो सकता कि हर बार किसी की पतंग कटकर सड़क पर आ जाये और ऐसी घटना घट जाती है। लगातार तीन-चार घटनाओं ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कौन है इसके पीछे। क्या कोई साइको किलर है या फ़िर कोई गैंग। दिन में पटना की सबसे व्यस्त सड़कों में से एक राजेंद्रनगर पुल पर भी ऐसी घटना होना काफ़ी भयावह है।

Special Report Credit- Hrishikesh Sharma 

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