भारत के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने छत्तीसगढ़ में हुए नक्सली हमले के बाद कहा है कि नक्सलवाद का सामना करने की रणनीति की समीक्षा की जाएगी और ज़रूरत हुई तो उसमें बदलाव भी किया जाएगा.
छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले में सोमवार को माओवादियों के हमले में केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ़) के 25 जवान मारे गए और सात अन्य घायल हो गए.
सुकमा हमले के बाद राज्य के दौरे पर पहुँचे राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री रमन सिंह के साथ रायपुर में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इस सिलसिले में दिल्ली में आठ मई को एक बैठक बुलाई गई है जिसमें केंद्र और कई राज्यों के अधिकारी हिस्सा लेंगे.
उन्होंने कहा,”हमने ये फ़ैसला किया है कि जो हमारी एलडब्ल्यूई (लेफ़्ट विंग एक्स्ट्रीमिज़्म) की स्ट्रैटेजी है, हम उसकी समीक्षा करेंगे और ज़रूरत हुई तो हम उसमें बदलाव भी करेंगे.”

राजनाथ सिंह ने कहा कि नक्सलियों के ख़िलाफ़ केंद्र और राज्य सरकार की कार्रवाई के कारण पहले से ही ऐसी आशंका थी कि नक्सली कोई बड़ी वारदात कर सकते हैं.
उन्होंने कहा,”अब तक जो कार्रवाई की गई उसके कारण जो बौखलाहट है उनके अंदर, ये उसी का परिणाम है.”
संवाददाता सम्मेलन में राजनाथ सिंह से ये पूछे जाने पर कि सरकार कैसे कार्रवाई कर सकती है जबकि अभी तक सीआरपीएफ़ के महानिदेशक को भी चुना नहीं जा सका है, उन्होंने कहा कि नेतृत्व का कोई संकट नहीं है और अधिकारियों की योग्यता पर सवाल उठाना उचित नहीं है.
उन्होंने ये भी कहा कि अगर ज़रूरत पड़ी तो और भी सीनियर अफ़सरों को नियुक्त किया जाएगा.
राजनाथ सिंह ने कहा कि ऐसे मौक़े पर दोषारोपण नहीं किया जाना चाहिए.