न्यूज़ बिहार डेस्क ।पटना राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बेटे और पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव एक बार फिर से मुश्किलों में घिर गये हैं. तेजप्रताप के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी के विधान पार्षद सूरज नन्दन प्रसाद ने न्यायालय में मामला दर्ज कराया है. इसके अलावा बिहार विधानसभा से उनकी सदस्यता भी रद्द करने की मांग की गई है. मामला चुनाव में तथ्यों को छिपाने का है. भाजपा विधान पार्षद ने पटना के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में शिकायत दर्ज करायी है.

औरंगाबाद की जमीन छिपाने का आरोप
राजद विधायक व पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव द्वारा औरंगाबाद में 53 लाख 34 हजार में खरीदी गई 45.24 डिसमिल जमीन का विवरण 2015 में चुनाव आयोग को दिये गये शपथपत्र में छुपाने और जनता को धोखा देने के आरोप में मामला दर्ज कराया गया है. भाजपा के विधान पार्षद सूरजनन्दन प्रसाद ने पटना के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में मुकदमा संख्या 3838(सी)/2017 दर्ज करा कर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125 ए और आईपीसी की धारा 193 के अन्तर्गत संज्ञान लेने का अनुरोध किया है. शिकायत पत्र में राजद विधायक के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर कोर्ट में उपस्थित होने और सुनवाई प्रारंभ कर उन्हें कड़ी से कड़ी सजा देने का निवेदन किया गया है.
भाजपा नेता का आरोप
भाजपा विधान पार्षद ने अपनी शिकायत में कहा है कि महुआ (वैशाली) के राजद विधायक तेज प्रताप यादव ने औरंगाबाद में 16 जनवरी, 2010 को सात लोंगो से अलग-अलग डीड के जरिये आईसीआईसीआई, बैंक की कनॉट प्लेस, नई दिल्ली ब्रांच की चेक से 53 लाख 34 हजार रुपये का भुगतान कर 45.24 डिसमिल जमीन खरीदा था. जबकि 2015 में चुनाव आयोग को दिए गये सम्पति के ब्योरा में जानबूझ कर इस सम्पति को छुपा लिया गया था. संपत्ति विवरण पत्र में इसका जिक्र तक नहीं किया गया. मालूम हो कि तेजप्रताप के इस जमीन पर फिलहाल लारा डिस्ट्रीब्यूटर्स प्रा. लि. की ओर से हीरोहोडा का शोरूम चल रहा है. दरअसल जानबूझ कर सम्पति के ब्योरे को छुपाना न केवल चुनाव आयोग को धोखा देना है बल्कि लोक प्रतिनिधित्व की धारा 125 ए का भी उल्लंघन है. लोकप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125 ए के अन्तर्गत जहां जानबूझ कर तथ्य छुपाने व झूठे शपथपत्र दाखिल करने पर सदस्यता समाप्त करने का प्रावधान है, वहीं आईपीसी की धारा 193 के अन्तर्गत सात साल तक की भी सजा हो सकती है. इस मामले में भाजपा विधायक अरुण कुमार सिन्हा और सुमन कुमार झा गवाह भी हैं.