पटना, बिहार के राजनीतिक हलके में आज मौसम की गर्मी के साथ सियासी पारा चढाने वाले इनकम टैक्स के छापा पर न्यूज़ बिहार की बेवाक राय

आज सुबह सबेरे खबर आने लगी की ​लालू प्रसाद के 22 ठिकानों पर आईटी का छापा पड़ा है। यह खबर जंगल में आग की तरह प्रदेश से होते हुए देश विदेश में फ़ैल गई। राजनीति के धुरंधर जो काफी समय से फील्डिंग कर रहे थे। लूलू बॉल देख छक्का चौवा आँख मूंद कर मारने लगे। सबसे ज्यादा उतावले 12 वें खिलाड़ी के रूप में कोच के न पूछने पर भी विरोधी टीम की खामियां और अपने को हर बॉल बाउंड्री पार करने वाला खिलाड़ी बताने वाले सुशील मोदी की तो जैसे मुराद ही पूरी हो गई जैसे। लगे बिना खेल शुरू हुए चौवे छक्के की बरसात करने लगे।

इधर जितने मुंह उतनी बात, चलो ये मान भी लिया जाए की राजनीतिक लोगों का काम है मुद्दों को उछाल नामक मिर्च मशाला का तड़का दे खूब छौंक लगाना जिससे काम से कम लोग छींकने खांसने को मजबूर हों। पर लोगों तक खबर पहुंचाने वाले बिना किसी आधार के जब इस तरह नमक मिर्च मशाला का गैरजरूरी इस्तमाल करें ये चौथे खंभे की विश्वसनीयता को शोभा नहीं देता।
खैर बिना आधार और निराधा सिर्फ सुनी सुनाई बात पर भूचाल आने की भविष्यवाणी, अकारण किसी के संबंधों पर बिना आधार टिका टिप्पणी समझ से परे है। ऐसा भी कहा जा सकता है कि न आँखों देखि न कानों सुनी ऐसे को कैसे पंच चुनें

खैर आज जो एपिसोड जबर्दस्ती लोगों को परोसा जा रहा था। संध्या होते ही असलियत जैसे ही सामने आई, नकाब चेहरे पर डालने का सिलसिला शुरू हो गया। इधर जनता जो दिनभर कुछ अलग ही सोच परेशान हो रही थी। आपा खोने लगी और फिर ठेठा बिहारी अंदाज में खबरिया चैनल और खबरबाजों का आरती उतारने लगी।
हकीकत में यह आयकर विभाग के द्वारा की गई एक सामान्य और उसके अधिकार क्षेत्र की प्रक्रिया का हिसा थी। छापेमारी को बारीकी से देखे तो यह सही है कि कुल 22 स्थान पर हुई। पर सभी लालू प्रसाद के यहाँ या उनके संस्थाओं पर नहीं हुई। आयकर विभाग द्वारा छापेमारी दिल्ली और इर्दगिर्द के इलाकों में की गई जिसमे लालू प्रसाद यादव, राजद सांसद पीसी गुप्ता के साथ साथ कई कारोबारी, रियल एस्टेट एजेंटो के यहाँ हुई। इस कार्यवाई का मकसद पिछले कुछ समय से बेनामी सौदों के कारोबार में लिप्त कारोबारियों के द्वारा कथित 1,000 करोड़ रूपये के सौदों की जांच से जुड़ा था। कुल 12 स्थानों पर आयकर विभाग द्वारा छापेमारी और 10 अन्य आधिकारिक परिसरों का सर्वे किया गया। जिसमे दिल्ली, गुड़गांव, रेवाड़ी में कुछ जानेमाने कारोबारी तथा रियल एस्टेट एजेंट शामिल है। इसी क्रम में लालू प्रसाद और उनके परिवार से जुड़े एक भूमि सौदे में भी एक कारोबारियों के यहां तलाशी ली गई।

जनता को आखिर इस तरह की खबर और भ्रम से क्या हासिल होगा? अगर किसी के कहने पर आयकर विभाग छापेमारी करने लगे या कोई जब चाहे सरकार गिरा दे। एक तो इस पर भरोसा करना ही धोखा है दूसरे यह की स्वायत्त संस्थाओं और लोकतांत्रिक सरकार पर से लोगों का भरोसा उठ जाएगा। स्वायत्त संस्थाओं के कार्यों पर बिना प्रमाण के कोई भी टिका टिप्पणी और दुष्प्रचार करने से सभी को परहेज करना चाहिए ख़ास कर चौथे खम्भे को।