सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद बाजार के शोरुमों में खड़ी बीएस-3 बाइकों के दामों में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। बाजार में भीड़ तो दिख रही है लेकिन व्यापारियों के चेहरे की रौनक कहीं गायब है। बंपर छूट का फायदा लेने से पहले आपकों भविष्य के जोखिमों के प्रति भी सतर्क रहना होगा। कहीं ऐसा न हो जाए कि आप जिस फायदे के लिए अपनी जमा पूंजी खर्च कर रहे हैं। वो आपके लिए जोखिम बन जाए। इसलिए खरीददारी से पहले इन बातों पर जरूर ध्यान दें।

तारीख का रखें विशेष ध्यान
सरकारी नियम के मुताबिक 1 अप्रैल 2017 के बाद बीएस-3 वाहनों की रजिस्ट्री नहीं होगी। ऐसे में आपको वाहन खरीदते वक्त इस बात का ख्याल रखना होगा कि डीलर जो वाहन आपको दे रहा है। उसमे कोई भी तारीख 31 मार्च 2017 के बाद की न हो। क्योकि नियमानुसार 31 मार्च 2017 आधी रात के बाद खरीदे गए बीएस-3 वाहन बेकार हो जाएंगे। खरीदते समय, कागजों की तारीखों का गहनता से अध्यन करें।  क्योकि 1 अप्रैल के बाद जब आप रजिस्ट्रेशन कराने जाएंगे तो आपको ये प्रमाण देना होगा कि आपने ये वाहन 1 अप्रैल 2017 से पहले खरीदा है।
बड़े शहरों के लिए बड़ा जोखिम
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुछ जगहों पर (खासकर महानगरों को छोड़कर), आरटीओ ऑफिस ने आपसी सहमति से डीलरों को एक विकल्प दे दिया है। आरटीओ ने डीलरों को सहूलियत दी है कि उन बीएस 3 वाहनों की इनवॉइस बना लें जो अब तक नहीं बिक पाई हैं। एक सप्ताह के भीतर ही ग्राहकों को उनकी डीटेल दें दे। ऐसे में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता जैसे महानगरों में कारों पर ऐसी छूट जोखिम भरी है। इन जगहों पर अब BS-3 वाहनों के रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाएंगे।
बीएस-3 की रिसेल वैल्यू
एक और ध्यान देने वाली बात ये है, जिस तरह से अभी प्रक्रियाएं चल रही हैं उसी गति से सब चलता रहा तो 2020 तक वाहनों के लिए बीएस 6 उत्सर्जन नियम लागू कर दिए जाएंगे। ऐसे में आप जिस बीएस-3 वाहन की कीमत बिल्कुल कम हो जाएगी। एक स्थिति में ही बीएस-3 वाहनों की रिसेल वैल्यू बढ़ेगी। अगर सरकार इस बाबत कोई पॉलिसी लागू कर दे। जिसकी संभावना कम है। ऐसे में आज के वक्त में लगाया हुआ पैसा, 3 साल बाद नुकसान का सौदा भी लग सकता है।
बीएस-3 डिसपोजल नियम
सबसे बड़ा जोखिम ये है कि अगर बीएस-4 और 6 को लेकर बहुत गंभीरता से कदम उठाए गए। तो बीएस-3 गाड़ियों को डिस्पोज करने का अनिवार्य नियम भी बन सकता है। तो ऐसे में रिसेल वैल्यू तो छोड़िए आपको बीएस-3 श्रेणी के वाहन कबाड़ में देने पड़ जाएंगे।
कुल मिलाकर ये ऑफर छोटे शहरों के लिए बड़ा फायदा है। लेकिन इसमे जोखिम भी कम नहीं है। इसलिए वाहन खरीदने से पहले इन बातों को सोच-विचार लें। जल्दबाजी में उठाया गया कदम भविष्य में नुकसान भी पहुंचा सकता है।

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